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सोमवार, 28 अगस्त 2023

महत्वपूर्ण सरल ज्योतिष उपाय

 कुछ पर महत्वपूर्ण सरल ज्योतिष उपाय


ऐसा नहीं है कि ज्योतिष उपायों में कठिन और गहन उपाय ही काम करते हैं छोटे छोटे पर लगातार करने पर ये उपाय भी बहुत प्रभावशाली बन जाते हैं।


मैंने पहले भी कहा है जो व्यक्ति परिवार और समाज के लिए अपने कर्तव्यों को सही से निभाता है अनायास ही उसे ग्रहों के शुभ परिणाम मिलने शुरू हो जाते हैं।

पहले घरों में सबके नाम की रोटी निकालने की रीत थी जो आस पास के पशु पक्षियों को दी जाती थी।  ये जीव भी अलग अलग ग्रहों के कारक हैं।


अब न घर के आसपास इन पशुओं/पक्षियों की उपलब्धता है नहीं पहले जैसे नियमों को लोग निभा पाते हैं। 

 पर कभी कभी समय मिलने पर ये उपाय करने का प्रयास करें...... और इनके लाभ स्वयं महसूस करें।


1- गाय जो हरा चारा दें - मंदिरों गौशालाओं या सड़क पर घूमने वाले इन जीवों को हरा चारा, भीगी मूँग, घी रोटी और गुड़, अंकुरित जवारे(गेहूं) और चना खिलाएँ गाय सनातन धर्म मे पूज्यनीय है इन उपायों से आप अपने बुध, शुक्र, सूर्य और गुरु के अनुकूल परिणाम पा सकेंगे।


पक्षियों को दाना- पक्षियों को सात तरह के अनाज मिक्स (सतनाजा)करके खिलाएँ।

गेहूं

चावल

बाजरा

ज्वार

चने

मक्का

काली उड़द

ध्यान दें अनाज कभी भी छत के ऊपर न खिलाएँ बल्कि कच्ची मिट्टी वाली जगह पर खिलाएँ। सूर्य चंद्र मंगल बुध गुरु शुक्र शनि और राहु केतु लगभग सब की अनुकूलता के लिये है।


मछली को दाना-

मछली को आटे की गोलियां जब कभी मौका मिले खिलाइये मन मस्तिष्क का कारक चंद्र और राहु/केतु की अनुकूलता के लिए अचूक उपाय है।


कुत्ते को रोटी- 

ये जीव जंतु हम पर आश्रित हैं अगर घर के बाहर दिखाईं दें तो रोटी में तेल लगाकर खिलाएँ कर्म कारक शनि और राहु/केतु की अनुकूलता पाएं।


चींटी को पंजीरी/शक़्कर-

चींटियों को घर से बाहर ही पंजीरी, शक़्कर, भुना बेसन डालें। अनायास ही मंगल राहु सूर्य शनि और शुक्र के लाभ मिलेंगे। सूखे नारियल में बूरा तिल और घी भरके बढ़/पीपल की जड़ पर दबाकर रखवाते हैं इसका कारण है कि इन पुराने वृक्षों की जड़ों में चीटियां रहती है। जैसे जैसे नारियल और अन्य सामग्रियों को वो खाती जाती वैसे वैसे आपको लाभ मिलता जाता है।


अगले थ्रेड पर कुछ आसानी से उपलब्ध पर ग्रहों के कारक होने से चमत्कारिक प्रभाव वाले पौधों पर लिखूँगी जिनके स्वास्थ्य लाभ किसी भी अंग्रेज़ी दवाई से पहले बल्कि तुरंत लाभ दिखने लगते हैं।

ज्योतिष उपायों में "अर्चन" का महत्व

 ज्योतिष उपायों में "अर्चन" का महत्व


मैं ज्योतिष उपायों में अक्सर पूजा और अर्चना के विषय मे लिखती हूँ। जिसको समझने में लोग कंफ्यूज हो जाते हैं, विशेषकर "अर्चन" को लेकर।

"पूजा" का अर्थ है जब आप किसी स्तोत्र, मंत्र और पाठ आदि से भगवान का ध्यान और आराधना करें।

"अर्चना" मतलब किसी भेंट या सामाग्री से देवता का क्रमबद्ध पूजन जो कि अधिकतर सकाम मतलब "कामना की पूर्ति" के लिए किया जाता है।

अर्चना में आवश्यकता और मनोकामना के अनुसार ही अर्चन सामग्री का चयन किया जाता है।

गुम हुई वस्तु, प्रतिष्ठा को पाने का मंत्र

 गुम हुई वस्तु, प्रतिष्ठा को पाने का अचूक उपाय



गुम हुई वस्तु, धन, प्रतिष्ठा को वापस पाने के लिए  मंत्र।


रामचरितमानस के कुछ मंत्र स्वसिद्ध सौम्य शाबर मंत्र की श्रेणी में आते हैं जिनके प्रयोग में दो धारी तलवार के समान नुकसान देने वाली तीव्रता नही होती।

महादेव और अम्बिका के आशीर्वाद से ऐसे मंत्र/चौपाई/सोरठे, मैं आगे इस श्रृंखला में लिखती रहूँगी।


कलि बिलोकि जग हित हर गिरिजा। 

साबर मंत्र जाल जिन्ह सिरिजा॥

अनमिल आखर अरथ न जापू। 

प्रगट प्रभाउ महेस प्रतापू ।।

                    रामचरितमानस, बालकाण्ड


शिव-पार्वती ने कलियुग को देखकर, जगत् के हित के लिए, शाबर मन्त्र समूह की रचना की, जिन मंत्रों के अक्षर बेमेल हैं, जिनका न कोई ठीक अर्थ होता है और न जप ही होता है, तथापि श्री शिवजी के प्रताप से जिनका प्रभाव प्रत्यक्ष है।


अगर आपने मंत्र विज्ञान के बारे में जाना है तो आपको पता होगा कि शाबर मंत्रों को तुरंत फल देने वाला माना जाता है, पर इनकी शक्ति इतनी तीव्र होती है कि गलत प्रयोग से व्यक्ति स्वयम का भी नुकसान कर सकता है इसलिए इन्हें गुरु सानिध्य में ही करना चाहिए।  मानस के ये मंत्र महादेव के आशीर्वाद से बिना गुरु से प्राप्त किये भी प्रयोग किये जा सकते हैं।


तो खोई हुई वस्तु पाने का छोटा और सरल दिखने वाला पर अचूक मंत्र/चौपाई लिखते हैं इसका प्रयोग विभिन्न विधियों से आवश्यकता अनुसार व समस्या की स्थिति देख कर किया जाता है। 

आप सामान्यतः इसकी 11/21/27....... माला जप कर सकते हैं।

कुछ भी चोरी होने, गुम होने पर, कही पैसे फस जाने, किसी के घर छोड़कर जाने पर, प्रतिष्ठा हानि होने पर उन्हें वापस पाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।


गई बहोर ग़रीब नेवाजू। 

सरल सबल साहिब रघुराजू॥


प्रभु श्री रघुनाथजी गई हुई वस्तु को फिर प्राप्त कराने वाले, ग़रीब नवाज (दीनबन्धु), सरल स्वभाव, सर्वशक्तिमान और सबके स्वामी हैं।

शनिवार, 12 अगस्त 2023

बिच्छू के ज़हर का अचूक उपाय

 Remedy for Scorpion Sting


    ~बिच्छू के ज़हर का अचूक उपाय~


पिछले तीन दिन में बिच्छू द्वारा काटे जाने पर मेरे पास दो फ़ोन आये, बारिश का मौसम, खासकर गांव देहात में ही नही शहरों  में भी बिच्छू आदि का डर आजकल बना रहता है।

तो ईश्वर का नाम लेकर इसकी एक अचूक दवा मैं आज आप लोगों को बताऊंगी। 

इमली का बीज लेकर उसे बीच से फोड़कर दो भागों में बांट ले, अब सफेद भाग यानी उस टुकड़े के अंदरुनी भाग को, थोड़ा सा पानी डालकर एक साफ पत्थर पर घिसें, पिसे हुए काजू की तरह की लुगदी सी बन जाएगी, बस अब इसे पोछे बिना ऐसे ही बिच्छू के कटे हुए स्थान पर चिपका दें।

अब अगर वो व्यक्ति मैराथन भी दौड़ लेगा न, तो ये बीज तब तक नही छूटेगा, जब तक कि पूरा विष नही खींच लेगा।

जलन में तुरंत आराम मिलेगा ही और कुछ घंटों में ज़हर खींच कर यर बीज भी खुद ही गिर जाएगा।

मैने इसे स्वयं प्रयोग करके देखा तभी लिख रही हूं, अधिकतर मेरे बताए हुए उपाय मानकर चलिए अनुभूत ही होते हैं।


विष के प्रकार या वर्गीकरण पर मुझे जानकारी नही है थोड़ा जानने का प्रयास किया तो था जिससे लगता है कि ये बीज का उपाय शायद न्यूरोटॉक्सिक विष पर  कार्य करता है, मैंने इसका प्रयोग केवल बिच्छू के डंक पर ही सफलतापूर्वक किया है।

मंगलवार, 18 जुलाई 2023

मंगल की महादशा में विभिन्न ग्रहों की अंतर दशाओं के दुष्प्रभावों का शिव पूजा/ अनुष्ठान से निवारण।

 

मंगल

मंगल की महादशा में विभिन्न ग्रहों की अंतर 

दशाओं के दुष्प्रभावों का शिव पूजा/ अनुष्ठान 

से निवारण।

◆मंगल की महादशा में, मंगल की अन्तर्दशा में 

रुद्र-जप तथा वृषभदान करना चाहिये।

◆राहु की अन्तर्दशा होने पर नाग का दान, ब्राह्मण 

भोजन तथा मृत्युंजय मन्त्र जप कराने से आयु एवं 

आरोग्य की प्राप्ति होती है।

नागदानं प्रकुर्वीत देवब्राह्मणभोजनम् ।
मृत्युंजयजपं कुर्यादायुरारोग्यमादिशेत् ॥


मंगल में बृहस्पति की खराब अन्तर्दशा होने पर
शिवसहस्रनामावली का जप करना चाहिये।

'तद्दोष-परिहारार्थं शिवसाहस्त्रकं जपेत् ।'

इसी प्रकार शनि की दोषयुक्त अन्तर्दशा में मृत्युंजय 

मन्त्र के जप का विधान है।

सोमवार, 17 जुलाई 2023

सोमवती अमावस्या- पितृदोष व कालसर्प दोष से सम्बंधित उपाय करें

 


               सोमवती अमावस्या 

पितृदोष व कालसर्प दोष से सम्बंधित उपाय करें


सोमवती अमावस्या को सूर्यग्रहण के समान फलदायी कहा गया है, इस दिन किया गया स्नान, दान, जप, तर्पण आदि अनंत गुणा फल देता है।


अमावास्या तु सोमेन सप्तमी भानुना सह।

चतुर्थी भूमिपुत्रेण सोमपुत्रेण चाष्टमी।।

चतस्रस्तिथयो स्त्वेताः सूर्यग्रहण सन्निभाः।

स्नानं दानं तथा श्राद्धं सर्वं तत्राक्षयं भवेत्।।


सोमवारी अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी एवं बुधवारी अष्टमी तिथीयां सूर्यग्रहण के समान फल देने वाली कही गयी हैं। इन तिथियों में किया गया स्नान, दान, जप, तर्पण आदि अनंतकोटि फलदायी कहा गया है।

इस दिन पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान करना विशेष शुभ कहा गया है।


वे जो पितृदोष से पीड़ित है आज पीपल 108 परिक्रमा "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र के साथ करें, अर्घ्य जनेऊ अर्पित करें।


वे जो पितृ कर्म के कर्तव्य में बंधे हैं प्रत्येक अमावस्या को अवश्य  तर्पण आदि नियमों का पालन करें, आज तो परम पुण्यकारी सोमवती अमावस्या है आप स्वयं नही कर पा रहें है तो ब्राह्मण को बुलाकर विधि विधान से कर्तव्य का निर्वहन करें। याद रहे देव पूजा भाव प्रधान है पर पितृसत्ता के निमित्त किया जाने वाला कारक नियमपूर्वक व विधि विधान से किया जाना चाहिये। केवल इस कार्य से आप देखेंगे कि आप की बहुत सारी समस्याओं का स्वतः ही समाधान हो जाएगा। समय के साथ साथ अंतर महसूस होगा आपको।


आज सौभाग्वती स्त्रियों के द्वारा तुलसी/पीपल की परिक्रमा कर सौभाग्यकारक शिव-पार्वती पूजा का विधान भी किया जाता है। जिसमे 108 परिक्रमा किन्ही 108 वस्तुओं फल, मेवे, सौभाग्य सामाग्री इत्यादि से पूर्ण कर, पूजा आदि कर, सभी वस्तुएँ सौभाग्यशाली स्त्री/ ब्राह्मणी को दे दी जाती हैं।


शनिवार, 15 जुलाई 2023

मंगल - सावन में करें ग्रहों के अनुसार ज्योतिष उपाय



    सावन में करें ग्रहों के अनुसार उपाय


                       ~मङ्गल~


वैदिक ज्योतिष में मंगल को सेनापति की संज्ञा दी गयी अर्थात आक्रामकता, वीरता, कर्म को वरीयता, ये जितना सृदृण रक्षक है उतना ही प्रबल मारक भी, शरीर मे रक्त का कारक विशेषकर लाल रक्त कणिकाओं की मात्रा का निर्धारण करने वाला। 


जल्दबाजी, बहुत ज्यादा भावनात्मक, मंगल को भुमि पुत्र अर्थात "भौम" भी कहा जाता है, अगर किसी भी स्थिति में कुंडली मे बली है तो माता से विशेष भावनात्मक लगाव होता ही है।


ज्योतिष में विशेषकर मेडिकल एस्ट्रोलॉजी में जातक को सर्जरी की आवश्यकता, माइनर या मेजर सर्जरी का होना, रक्तविकार, चोट लगना, कर्ज़/ऋण भी मंगल के प्रभाव से देखा जाता है, जमीन से संबंधित लाभ और विवाद आदि में मंगल का विशेष प्रभाव देखा जाता है।


मंगल भाई व मित्र व उनके साथ आपके संबंधों, उनसे होने वाले लाभ-हानि आदि को भी दिखता है।


सावन में कैसे करें मंगल के उपाय-


मंगलवार का व्रत करें, नारसिंह स्तोत्र, मङ्गल कवच, हनुमान चालीसा का अनुष्ठानात्मक प्रयोग करें।


अगर ऋण से पीड़ित हैं तो ऋणमोचक मंगल/ नारसिंह स्तोत्र का पाठ करें।


अगर बार बार चोट लग रही है, गाड़ी और शरीर में स्क्रेच लगते ही रहते हैं तो भी मंगल का उपाय करें, मंगल व्रत, हनुमान साधना करें।


ऐसे लोग विशेषकर यात्रा में निकलते समय हनुमानद्वादशनाम का पाठ करके ही निकलें।


जमीन संबंधित मामलों में लाभ और हानि का कारक भी मंगल ही है, ऐसे में अगर आपको नाकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है जमीनी विवाद, बार बार जमीन आदि से जुड़े कामों में अड़चन, भाइयों और मित्रों की तरफ से तनाव व भय आदि दे रहा है तो मंगल और तृतीय/चतुर्थ भाव से सम्बंधित उपाय करें।


अगर लाभकारी होकर आपको जमीन, कंस्ट्रक्शन, माइनिंग या किसी भी तरह से मिट्टी से जुड़े लाभ मिल रहे हैं तो इसे व्रत उपाय आदि से और बली करें।


इमोशन्स पर कंट्रोल बहुत जरूरी है ऐसे लोग प्रायः भावनात्मक रूप से या तो बहुत कठोर अथवा बहूत कमज़ोर होते हैं, कठोर नारियल के अंदर नरम गिरी की तरह, तो जो इन्हें समझ लेता है उन्हें पता होता है कि इनसे कैसे काम निकलना है, तो मेडिटेशन करें, स्वयं  खुद फोकस और स्वयं ही कंट्रोल करें।


इस श्रावण भर शिवालय में प्रतिदिन तांबे के बने दिए पर घी का दीपक लगाए।


रक्त चंदन को अपने हाथों से घिसकर महाद्रव का श्रृंगार करें।


तांबे के लोटे में गुड़, रक्तचंदन मिलाकर महादेव का अभिषेक करें।


रक्तचंदन से बेलपत्र पर लिख कर  "ॐ साम्बसदाशिवाय नमः"  मंत्र के साथ महादेव का 27/108/1008 यथासम्भव संख्या में अर्चन करें।


मसूर की दाल/ मलका से महादेब का अर्चन करें।


अगर मंगल नाकारात्मक है व हाई ब्लड प्रेशर आदि दे रहा है तो मसूर की दाल का खाने में बिल्कुल प्रयोग न करें।


अगर शुभ भावों का स्वामी नहीं है मंगल तो मंगल की दान समाग्री आदि का ब्राह्मण/ क्षत्रिय को दान करें,  शुभ भाव का स्वामी होने पर ये समाग्री किसी को दान न देकर केवल शिवलिंग पर अर्पित कर दें।


मंगलवार और मंगल के नक्षत्रों 


मृगशिरा

चित्रा

धनिष्ठा,  


में ये उपाय अवश्य करें।


कुंडली मे अच्छा मंगल पुलिस, आर्मी पैरा फोर्सेस में भी स्थिति अनुसार व्यक्ति को कार्यरत होने का अवसर देता है, इन संस्थानों में हायर पोस्ट पर अधिकतर मंगल से विशेष रूप से प्रभावित व्यक्ति कार्यरत देखे जाते हैं, तो अगर आप आर्मी, पैरा फोर्सेस, या IPS/ज्यूडिशियल सर्विस की तैयारी कर रहे हैं तो अपनी कुंडली को प्रबल करें। क्योंकि ग्रहों में सेनापति मंगल ही है।


वैसे तो हर कुंडली अलग है और हर कुंडली पर करने वाले उपाय भी अलग अलग ही होते हैं पर यहां मैने कुछ ऐसे उपाय दिए हैं जोकि लगभग सभी कर सकते हैं, तो इस सावन इन उपायों से लाभ उठायें।



बुधवार, 12 जुलाई 2023

सूर्य - सावन में ग्रहों के अनुसार उपाय

 Astrology & Remedies


     


               सूर्य ग्रह


सावन में आप अपने ज्योतिषाचार्य के बताए जिस भी ग्रह का उपचार करना चाहते हैं तो उसे शिवमन्दिर में करें, महादेव का उस ग्रह की कारक सामाग्री से अर्चन करें। 


उग्र व नकारात्मक भावों का स्वामी है तो दान भी करें।


शुभ भावों का स्वामी होकर कमज़ोर है तो उसका जप, स्तोत्र पाठ आदि करें।


जैसे लग्नेश अगर कमज़ोर है तो जातक की प्रतिरोधक क्षमता में कमी, निर्णय लेने को क्षमता में कमी,बातों में प्रभावशीलता की कमी, लीडरशिप की क्षमता में कमी, आत्मविश्वास में कमी आदि देता है देखा जाए तो अगर लग्नेश बली है तो कुण्डली की बांकी कमियों को काफी मात्रा में सम्हाल लेता है।


तो लग्नेश को बली करें, इस से जुड़े ग्रह का दान कभी न करें। 


जैसे सूर्य लग्नेश है तो तांबा, गेहूँ, आदि सूर्य से जुड़ी कारक सामाग्री का भी भी दान न करें। कभी कभी जब लग्नेश किसी कारण वश कुछ अप्रत्याशित परिणाम दे भी रहा है तो उसकी कारक सामग्री से शिवालय में लिंगार्चन कराएं।


जैसे सूर्य के लिए जपा के फ़ूल, सफेद मंदार के फूलों से शतार्चन या सहस्रार्चन करें। तांबे के लोटे से शिवलिंग का अभिषेक करें।


विशेषकर किसी मंदिर में शिवलिंग पर कलश नही है तो आप वहां तांबे के कलश की व्यवस्था कर सकते हैं।


विषेशकर रविवार और सूर्य के नक्षत्रों में दिए गए उपाय करने की कोशिश करें। 


कृतिका

उत्तरा फाल्गुनी

उत्तराषाढा


साथ ही सूर्य को अर्घ्य दें और सूर्याष्टकम और सूर्य के अन्य स्तोत्र आदि का पाठ करें।


गेहूँ के आटे का दिया, शुद्ध घी से शिवालय में सूर्योदय पर जलायें।


यग्योपवीत धारण करते हैं तो त्रिकाल नही तो यथा शक्ति सन्ध्या आदि करें।


बाँकी ग्रहों चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु आदि पर क्रमशः प्रदीन लिखती रहूँगी ताकि आप इसका लाभ ले सकें और इस सावन महादेब की आराधना के साथ साथ अपने ग्रहों के शुभ प्रभाव प्राप्त करने का भी प्रयास करें।

सोमवार, 3 जुलाई 2023

मंगला गौरी स्तोत्रं

 मंगला गौरी स्तोत्रं


रक्ष-रक्ष जगन्माते देवि मङ्गल चण्डिके।

हारिके विपदार्राशे हर्षमंगल कारिके ।।

हर्षमंगल दक्षे च हर्षमंगल दायिके ।

शुभेमंगल दक्षे च शुभेमंगल चंडिके।।

मंगले मंगलार्हे च सर्वमंगल मंगले ।

सता मंगल दे देवि सर्वेषां मंगलालये ||

पूज्ये मंगलवारे च मंगलाभिष्ट देवते।

पूज्ये मंगल भूपस्य मनुवंशस्य संततम्।।

मंगला धिस्ठात देवि मंगलाञ्च मंगले |

संसार मंगलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम्।।

देव्याश्च मंगलंस्तोत्रं यः श्रृणोति समाहितः ।

प्रति मंगलवारे च पूज्ये मंगल सुख-प्रदे ।।

तन्मंगलं भवेतस्य न भवेन्तद्-मंगलम्।

वर्धते पुत्र-पौत्रश्च मंगलञ्च दिने - दिने ।।

मामरक्ष रक्ष-रक्ष ॐ मंगल मंगले ।

।। इति मंगलागौरी स्तोत्रं सम्पूर्ण ।।

कन्या के शीघ्र विवाह के लिए करें सावन में ये उपाय


कन्या के शीघ्र विवाह के लिए करें सावन में ये उपाय

श्रावण मास के मंगलवार को मंगलागौरी व्रत का विधान किया जाता है इस व्रत को नवविवाहित स्त्रियां 5 वर्ष के लिए करने का संकल्प लेती हैं। यह व्रत अखंड सौभाग्यदायक और सुख संतान की प्राप्ति करने वाला कहा गया है।

वे कन्याएं जिनकी कुंडली मे सप्तम भाव से सम्बंधित दोष आदि कहे जाते हैं, विवाह होने में देरी हो रही हो, विवाह सुख में बाधा जैसे दोष कुंडली मे देखे गए हों तो ऐसे में भी कन्याओं के द्वारा विवाह संबंधी दोष के निवारण के लिए "मंगलागौरी" व्रत किया जाता है।

इस व्रत को पांच,नौ, ग्यारह वर्ष तक करने का संकल्प लें, और सावन के प्रत्येक मंगलवार को विधिवत माता गौरी की पूजा करें। 16 दीपक, 16 फल, 16 श्रृंगार, सप्तमेवे और सप्तधान्य की 16-16 ढेरियों को रख, देवी गौरी का विभिन्न सामग्री से 16-16 बार अर्चन करें। व्रत की समाप्ति के दिन सोलह सौभाग्वती स्त्रियों को बुलाकर भोजन कराएं, यथाशक्ति दक्षिणा व सौभाग्य सामाग्री देकर आशीर्वाद लें।


माँ सीता के द्वारा माँ पार्वती स्तुति


जय जय गिरिराज किसोरी।
जय महेस मुख चंद चकोरी॥
जय गजबदन षडानन माता।
जगत जननि दामिनी दुति गाता॥
देवी पूजि पद कमल तुम्हारे।
सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे॥
मोर मनोरथ जानहु नीकें।
बसहु सदा उर पुर सबही के॥
कीन्हेऊं प्रगट न कारन तेहिं।
अस कहि चरन गहे बैदेहीं॥
बिनय प्रेम बस भई भवानी।
खसी माल मुरति मुसुकानि॥
सादर सियं प्रसादु सर धरेऊ।
बोली गौरी हरषु हियं भरेऊ॥
सुनु सिय सत्य असीस हमारी।
पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥
नारद बचन सदा सूचि साचा।
सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा॥

मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु
सहज सुंदर सांवरो।
करुना निधान सुजान सीलु
सनेहु जानत रावरो॥

एही भांती गौरी असीस सुनी
सिय सहित हियं हरषीं अली।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि
मुदित मन मंदिर चली॥

जय जय गिरिबरराज किसोरी।
जय महेस मुख चंद चकोरी।।
जय गजबदन षडानन माता।
जगत जननि दामिनि दुति गाता।।
नहिं तव आदि मध्य अवसाना।
अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना।।
भव भव विभव पराभव कारिनि।
बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि।।

[दोहा]
पतिदेवता सुतीय महुँ,
मातु प्रथम तव रेख।
महिमा अमित न सकहिं कहि,
सहस सारदा सेष।।

सेवत तोहि सुलभ फल चारी।
बरदायिनी पुरारि पिआरी।।
देबि पूजि पद कमल तुम्हारे।
सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे।।
मोर मनोरथु जानहु नीकें।
बसहु सदा उर पुर सबहिं कें।।
कीन्हेउँ प्रगट न कारन तेहीं।
अस कहि चरन गहे बैदेहीं।।
बिनय प्रेम बस भई भवानी।
खसी माल मूरति मुसुकानी।।
सादर सियँ प्रसादु सिर धरेऊ।
बोली गौरि हरषु हियँ भरेऊ।।
सुनु सिय सत्य असीस हमारी।
पूजिहि मन कामना तुम्हारी।।
नारद बचन सदा सुचि साचा।
सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा।।

[छंद]
मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु,
सहज सुंदर साँवरो।
करुना निधान सुजान सीलु,
सनेहु जानत रावरो।।
एहि भाँति गौरि असीस सुनि सिय,
सहित हियँ हरषीं अली।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि,
मुदित मन मंदिर चली।।

[सोरठा]
जानि गौरि अनुकूल सिय,
हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल,
बाम अंग फरकन लगे।।


कुंडली मे विवाह बाधा के उपाय

सावन के पहले दिन रामचरितमानस के मासिक पारायण का संकल्प लें।

सुनु सिय सत्य असीस हमारी।
पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥

चौपाई से सम्पुटित का पाठ करें, नित्य 1-2 घंटे एक निश्चित समय पर पाठ करें, पंडित जी बुलाने से वो पाठ विधिवत शुरू कर देंगे, और पाठ पूर्ण होने पर विधिवत समापन भी कर देंगे। 

कन्या के विवाह में आने वाली बाधाओं के निवारण के लिए ये विधान मेरे अनुभव में अवश्य फल देने वाला देखा गया है।


उक्त मंत्र की कम से कम 5 मालाएँ प्रतिदिन करें


ऊपर अयोध्याकांड से सीता जी द्वारा गौरी पूजा की वंदना दी गयी है सुबह शाम इसका भी पाठ करें।


सुख सौभाग्य की देवी, शिवप्रिय "गौरी" माता आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेंगी।



शनिवार, 1 जुलाई 2023

राहु महादशा व गोचर

 🔴Astrology&Remedies🔴


राहु महादशा, अंतर/गोचर उपाय


1- शनिवार (आज) शाम को अलसी के तैल और लाल मौली/कलावे की बत्ती का चौमुखा दीपक, शिवालय में लगाएं।

2- दुर्गा स्तोत्र चालीसा जो भी हो पाठ करें।

3- बेल पत्र, विजया/भाँग पत्र, विष्णुकांता के फूलों से शिवलिंग का अर्चन करें।

4- सरस्वती मंत्र का जप करें।

5 मेडिटेशन करें, सार्वजनिक स्थानों की तो कर नही सकते तो धार्मिक स्थलों में सफाई करें।


राहु का वैदिक स्वरूप बिना धड़ का सिर है, मतलब राहु का प्रभाव सबसे पहले आपकी सोच/मस्तिष्क पर पड़ता है। अगर राहु के कुप्रभाव हैं तो मानसिक उलझन, निर्णय लेने की क्षमता में कमी, बहुत ज्यादा कंफ्यूज़न, रात में नीद न आना, आदि कुछ लक्षण हैं। स्क्रीन/सोशल मीडिया में जरूरत से ज्यादा समय देना भी राहु को और खराब करता है, ये आप पर निर्भर करता है कि आप सोशल-मीडिया या फ़ोन पर ज्ञानवर्धक चीज़े या किताबें/pdf पढ़ेंगे या फालतू रील्स देखने में वक्त बर्बाद करेंगे। 

मतलब मस्तिष्क और सोच को स्वच्छ रखिये, मेडिटेशन करिए, एक्सरसाइज करिए, स्तोत्र मंत्रो का पाठ करिए, मंत्रों का पाठ भी मानसिक और भावनात्मक बल देता है।

एक बात और पानी की बर्बादी का कारण मत बनिये, पानी ज्योतिष में चंद्रमा अर्थात मन का कारक कहा गया है, इसलिए राहु का दुष्प्रभाव होने पर अक्सर घर मे पानी के स्तोत्र से पानी बहना शुरू हो जाता है। बार बार सही करने के बाद भी नल टपकते रहते हैं। मतलब चंद्रमा/मन यानी शुद्ध पानी, राहु अर्थात अशुद्ध स्थान में बहकर पहुंच रहा है। जैसे जैसे ये बढ़ेगा वैसे वैसे चंद्रमा कमज़ोर होगा और राहु का कंफ्यूज़न भी बढ़ता जाएगा जातक पर।

अगर कुंडली मे राहु के दुष्प्रभाव हैं और आप महादशा, गोचर से निकल रहे हैं तो बार बार एक सी गलतियां होना, एक लूप सा बन जाता है जिसमे व्यक्ति गोल गोल घूमता रहता है। वहीं शुभ प्रभाव में राहु अनायास यश,कीर्ति, धन, पद की प्राप्ति का कारण बनता है। कलयुग शुक्र व राहु प्रधान कहा गया है, जहाँ दिखावा/प्रपञ्च/स्वार्थ सन्यासियों को भी नही छोड़ रहा तो हम लोग तो सामान्य लोग हैं। इसलिए मन को मजबूत रखें राहु यानी भ्रम का मात्र एक ही उपाय है ज्ञान, सरस्वती साधना शिक्षा, गीतसंगीत, वाद्ययंत्रों का प्रयोग करें। जरूरी नही धार्मिक पर मीनिंगफुल किताबें पढ़ें, सस्ते साहित्य और वीडिओज़ से दूरी बनाएं



जयतु सनातन🚩

गुरुवार, 29 जून 2023

श्रावण शनिवार व्रत

 श्रावण शनिवार व्रत सावन के सोमवार का व्रत रखने के विषय मे सभी जानते हैं। सावन के मंगलवार को "मंगलागौरी व्रत" भी संभवतः आपने सुना हो। पर क्या आप जानते हैं "स्कंदपुराण" के अनुसार सावन के शनिवार को भगवान नरसिम्हा स्वामी, हनुमान जी और शनि देव के लिए विशेष पूजन किया जाता है। "श्रावणे मासि देवानां त्रयानां पूजनं शनौ। नृसिंहस्य शनैश्चव्य अञ्जनीनन्दनस्य च।।" श्रावण मास में शनिवार के दिन नृसिंह भगवान, शनिदेव तथा अंजनीपुत्र हनुमान इन तीनों देवताओं का पूजन करना चाहिए। श्री नारसिंह भगवान का लक्ष्मी माता सहित पूजन करना चाहिए, इस दिन लाल नीले पुष्पों से उनका पूजन कर गुड़ सौंठ का भोग लगाएं। इसके प्रभाव से व्यक्ति सभी भोग और ऐश्वर्य को प्राप्त कर लेता है, और शत्रुओं से पीड़ा का भय भी समाप्त होता है। ◆आंजनेय हनुमान को पीपल/मंदार/तुलसी के पत्तों सुन्दर माला, अपराजिता, जपा, गुलाब, नीले मंदार के फूल से सुसज्जित कर, विधि पूर्वक उनका पूजन किया जाए। श्री राम रक्षा स्तोत्र, हनुमान चालीसा, हनुमद् द्वादशनाम इत्यादि का पाठ करें। स्कंदपुराण के अनुसार कहा गया है कि- “शनिवारे श्रावणे च अभिषेकं समाचरेत, रुद्रमंत्रेण तैलेन हनुमत्प्रीणनाय च। तैलमिश्रितसिन्दूरलेपमं तस्य समर्पयेत” श्रावण के शनिवार को रुद्रमंत्र के द्वारा तेल से हनुमान जी का अभिषेक करना चाहिए। तेल में मिश्रित सिन्दूर का लेप(चोला) उन्हें समर्पित करना चाहिए। श्रावणे मंदवारे तु एवमाराध्य वायुजं। वज्रतुल्यशरीरः स्यादरोगो बलवान्नरः।। वेगवान्कार्यकरणे बुद्धिवैभवभूषितः। शत्रु: संक्षयमाप्नोति मित्रवृद्धि: प्रजायते।। वीर्यवान्कीर्तिमांश्चैव प्रसादादंञ्जनीजने।” इस प्रकार श्रावण में शनिवार के दिन वायुपुत्र हनुमानजी की आराधना करके मनुष्य वज्रतुल्य शरीर वाला, निरोग और बलवान हो जाता है। अंजनीपुत्र की कृपा से वह कार्य करने में वेगवान, तथा बुद्धि वैभव से युक्त हो जाता है, उसके शत्रु नष्ट हो जाते हैं, मित्रों की वृद्धि होती है और वह शक्तिवान तथा कीर्तिमान हो जाता है। ◆शिवपुराण के अनुसार- अपमृत्युहरे मंदे रुद्राद्रींश्च यजेद्बुधः  ॥  तिलहोमेन दानेन तिलान्नेन च भोजयेत् ॥ शनैश्चर अल्पमृत्यु का निवारण करने वाले है, इस दिन बुद्धिमान पुरुष रुद्र आदि की पूजा करे। तिल के होम से, दान से देवताओं को संतुष्ट करके ब्राह्मणों को तिलमिश्रित अन्न भोजन कराएं। तेल, लोहा, काला तिल, काला उडद, काला कंबल, दान करना चाहिए। शनिदेव की प्रसन्नता के लिए शारीरिक रूप से अक्षमव्यक्ति की सेवा/सहायता करें, तिल के तेल से शनि का अभिषेक कराना चाहिए। उनके पूजन मे तिल तथा उड़द का प्रयोग करें। उसके बाद शनि का ध्यान करें: शनैश्चरः कृष्णवर्णो मन्दः काश्यपगोत्रजः।  सौराष्ट्रदेशसम्भूतः सूर्यपुत्रो वरप्रदः। दण्डाकृतिर्मण्डले स्यादिन्द्रनीलसमद्युतिः। बाणबाणासनधरः शूलधृग्गृध्रवाहनः। यमाधिदैवतश्चैव ब्रह्मप्रत्यधिदैवतः। कस्तूर्यगुरुगन्ध: स्यात्तथा गुग्गुलुधूपकः। कृसरान्नप्रियश्चैव विधिरस्य प्रकीर्तितः। शनिश्चर कृष्ण वर्ण वाले हैं, मन्द गति वाले हैं,  कश्यप गोत्र वाले हैं, सौराष्ट्र देश में उत्पन्न हुए हैं, सूर्य के पुत्र हैं, वर प्रदान करने वाले हैं,  दण्ड के समान आकार वाले मंडल में स्थित हैं, इंद्रनीलमणितुल्य कांतिवाले हैं, हाथों में धनुष बाण त्रिशूल धारण किए हुए हैं, गीध पर अरुण हैं, यम इनके अधिदेवता हैं, ब्रह्मा इन के प्रत्यधिदेवता हैं, ये कस्तूरी–अगुरु का गंध तथा गूगल की धूप ग्रहण करते हैं, इन्हें खिचड़ी प्रिय है, इस प्रकार ध्यान की विधि कहीं गई है । पूजा के लिए लौहमयी सुंदर प्रतिमा लेकर, पूजा में कृष्ण वस्तु (काली वस्तु) का दान करना चाहिये।ब्राह्मण को काले रंग के दो वस्त्र देने चाहिए और काले बछड़े सहित काली गौ प्रदान करनी चाहिए। शनि स्तुति - यः पुनर्नष्टराज्याय नीलाय परितोषितः। ददौ निजं महाराज्यं स मे सौरिः प्रसीदतु।। शनिं नीलाञ्जनप्रख्यं मन्दचेष्टाप्रसारिणम्। छायामार्तण्डसम्भूतं तन्नमामि शनैश्चरं।। नमस्ते कोणसंस्थाय पिङ्गलाय नमोऽस्तु ते। प्रसादं कुरु देवेश दीनस्य प्रणतस्य च।। आराधना से संतुष्ट होकर जिन्होंने नष्ट राज्य वाले नील को उनका महान राज्य पुनः प्रदान कर दिया, वे शनिदेव मुझ पर प्रसन्न हों। नील अंजन के समान वर्ण वाले, मंदगति से चलने वाले और छाया देवी तथा सूर्य से उत्पन्न होने वाले उस शनिश्चर को मैं नमस्कार करता हूँ। मंडल के कोण में स्थित आपको नमस्कार करता है,  पिंगल नाम वाले आप शनि को नमस्कार है। हे देवेश ! मुझ दीन तथा शरणागत पर कृपा कीजिए।। इस प्रकार स्तुति के द्वारा प्रार्थना करके बार-बार प्रणाम करना चाहिये। इस प्रकार श्रावण शनिवार को भगवान नारसिंह, हनुमान जी व शनिदेव का पूजन व व्रत कर सकते हैं। जयतु सनातन🚩  

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शिवार्चन, बिल्वपत्र और श्रावण मास

 शिवार्चन, बिल्वपत्र और श्रावण मास

          श्रावण/सावन विशेष

बिल्वमूले महादेवं लिंगरूपिणमव्ययम

यः पूजयति पुण्यात्मा स शिवं प्राप्नुयाद्॥

बिल्वमूले जलैर्यस्तु मूर्धानमभिषिञ्चति । 

स सर्वतीर्थस्नातःस्यात्स एव भुवि पावनः॥


बिल्व के मूल में लिंगरूपी अविनाशी महादेव का पूजन जो पुण्यात्मा व्यक्ति करता है, उसका कल्याण होता है। जो व्यक्ति शिवजी के ऊपर बिल्वमूल में जल चढ़ाता है उसे सब तीर्थो में स्नान का फल मिल जाता है।


बिल्वपत्र तोड़ने का मंत्र-


अमृतोद्भव श्रीवृक्ष महादेवप्रियः सदा ।

गृह्णामि तव पत्राणि शिवपूजार्थमादरात् ॥

(आचारेन्दु)


अमृत से उत्पन्न सौंदर्य व ऐश्वर्यपूर्ण वृक्ष महादेव को हमेशा प्रिय है। भगवान शिव की पूजा के लिए हे वृक्ष में तुम्हारे पत्र तोड़ता हूं।


बिल्वपत्र तोड़नेका निषिद्ध काल–चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावास्या तिथियों को, संक्रान्ति के समय और सोमवार को बिल्वपत्र न तोड़े',


अमारिक्तासु संक्रान्त्यामष्टम्यामिन्दुवासरे। 

बिल्वपत्रं न च छिन्द्याच्छिन्द्याच्चेन्नरकं व्रजेत् ॥

                                                 (लिङ्गपुराण)


किंतु बिल्वपत्र शंकर जी को बहुत प्रिय है, अतः निषिद्ध समयमें पहले दिन का रखा बिल्वपत्र चढ़ाना चाहिये । 


अर्पितान्यपि बिल्वानि प्रक्षाल्यापि पुनः पुनः । शंकरायार्पणीयानि न नवानि यदि क्वचित् ॥ 

(स्कन्दपुराण, आचारेन्दु,)


शास्त्र कथित  है कि यदि नूतन बिल्वपत्र न मिल सके तो चढ़ाये हुए बिल्वपत्र को ही धोकर बार-बार प्रयोग करते रहें।

जो फूल, पत्ते और जल बासी हो गये हों, उन्हें देवताओं पर न चढ़ाये। किंतु तुलसीदल और गङ्गाजल बासी नहीं होते। तीर्थों का जल भी बासी नहीं होता। 


वर्ज्य पर्युषितं पुष्पं वर्ज्यं पर्युषितं जलम् । 

न वर्ज्य तुलसीपत्रं न वर्ज्य जाह्नवीजलम् ॥ (बृहन्नारदीय)

न पर्युषितदोषोऽस्ति तीर्थतोयस्य चैव हि। (स्मृतिसारावली)


वस्त्र,यज्ञोपवीत और आभूषण में भी निर्माल्य का दोष नहीं आता। माली के घरमें रखे हुए फूलोंमें बासी दोष नहीं आता।


न निर्माल्यं भवेद् वस्त्रं स्वर्णरत्नादिभूषणम्। 

न पर्युषितदोषोऽस्ति मालाकारगृहेषु च। (आचारेन्दु०)


मणि,रत्न, सुवर्ण, वस्त्र आदिसे बनाये गये फूल बासी नहीं होते। इन्हें प्रोक्षण कर चढ़ाना चाहिये।

नारद जी ने 'मानस' (मनके द्वारा भावित) फूल को सबसे श्रेष्ठ फूल माना है। उन्होंने देवराज इन्द्र को बतलाया है कि हजारों-करोड़ों बाह्य फूलोंको चढ़ाकर जो फल प्राप्त किया जाता है, वह केवल एक मानस-फूल चढ़ानेसे प्राप्त हो जाता है। इससे मानस-पुष्प ही उत्तमं पुष्प है। बाह्य पुष्प तो निर्माल्य ही होते हैं। मानस पुष्प में बासी आदि कोई दोष नहीं होता। इसलिये पूजा करते समय मन से गढ़कर फूल चढ़ाने का अद्भुत आनन्द अवश्य प्राप्त करना चाहिये।


(★मानसपूजा पर मैने एक पोस्ट लिखा है उसे पढ़ें, आदि शंकराचार्यकृत स्तोत्र के साथ)


सामान्यतया निषिद्ध फूल यहाँ उन निषेधों को दिया जा रहा है जो सामान्यत: सब पूजा में सब फूलों पर लागू होते हैं। भगवान पर चढ़ाया हुआ फूल 'निर्माल्य' कहलाता है, सूँघा हुआ या अङ्ग में लगाया हुआ फूल इसी कोटि में आता है। इन्हें न चढ़ाये। भौंरे/मधुमक्खी के सूँघने से फूल दूषित नहीं होता। जो फूल अपवित्र बर्तन में रख दिया गया हो, अपवित्र स्थान में उत्पन्न हो, आग से झुलस गया हो, कीड़ों से विद्ध/काटा हो, सुन्दर न हो, जिसकी पंखुड़ियाँ बिखर गयी हों, जो पृथ्वी पर गिर पड़ा हो, जो पूर्णतः खिला न हो,जिसमें अप्रिय गंध आती हो, निर्गन्ध हो या उम्र गन्धवाला हो, ऐसे पुष्पों को नहीं चढ़ाना चाहिये। जो फूल बायें हाथ, पहनने वाले अधोवस्त्र, आक और अरण्ड के पत्ते में रखकर लाये गये हों, वे फूल त्याज्य है। कलियों को चढ़ाना मना है,किंतु यह निषेध कमल पर लागू नहीं है। फूलको जल में डुबाकर धोना मना है। केवल जल से इसका प्रोक्षण/छिड़क कर देना चाहिये ।

बिल्व पत्र अर्पित करते समय इन मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए:


त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुतम्।

त्रि जन्मपापसंहारं,विल्वपत्र शिवार्पणम्


भावार्थ: तीन गुण, तीन नेत्र, त्रिशूल धारण करने वाले और तीन जन्मों के पाप को संहार करने वाले हे शिवजी आपको त्रिदल बिल्व पत्र अर्पित करता हूं। 


दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनम्‌ पापनाशनम्‌ ।

अघोर पाप संहारं बिल्व पत्रं शिवार्पणम्‌ ॥


अखण्डै बिल्वपत्रैश्च पूजये शिव शंकरम्‌ ।

कोटिकन्या महादानं बिल्व पत्रं शिवार्पणम्‌ ॥


शिव को बिल्व-पत्र चढ़ाने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।इसलिए सावन भर प्रतिदिन 108 बिल्वपत्र की व्यवस्था कीजिए शिवार्चन के लिए। बांकी आप चढ़ाए हुए बिल्वपत्रों को धोकर पुनः प्रयोग के लिए रख ही सकते हैं।