Astrology & Remedies
सूर्य ग्रह
सावन में आप अपने ज्योतिषाचार्य के बताए जिस भी ग्रह का उपचार करना चाहते हैं तो उसे शिवमन्दिर में करें, महादेव का उस ग्रह की कारक सामाग्री से अर्चन करें।
उग्र व नकारात्मक भावों का स्वामी है तो दान भी करें।
शुभ भावों का स्वामी होकर कमज़ोर है तो उसका जप, स्तोत्र पाठ आदि करें।
जैसे लग्नेश अगर कमज़ोर है तो जातक की प्रतिरोधक क्षमता में कमी, निर्णय लेने को क्षमता में कमी,बातों में प्रभावशीलता की कमी, लीडरशिप की क्षमता में कमी, आत्मविश्वास में कमी आदि देता है देखा जाए तो अगर लग्नेश बली है तो कुण्डली की बांकी कमियों को काफी मात्रा में सम्हाल लेता है।
तो लग्नेश को बली करें, इस से जुड़े ग्रह का दान कभी न करें।
जैसे सूर्य लग्नेश है तो तांबा, गेहूँ, आदि सूर्य से जुड़ी कारक सामाग्री का भी भी दान न करें। कभी कभी जब लग्नेश किसी कारण वश कुछ अप्रत्याशित परिणाम दे भी रहा है तो उसकी कारक सामग्री से शिवालय में लिंगार्चन कराएं।
जैसे सूर्य के लिए जपा के फ़ूल, सफेद मंदार के फूलों से शतार्चन या सहस्रार्चन करें। तांबे के लोटे से शिवलिंग का अभिषेक करें।
विशेषकर किसी मंदिर में शिवलिंग पर कलश नही है तो आप वहां तांबे के कलश की व्यवस्था कर सकते हैं।
विषेशकर रविवार और सूर्य के नक्षत्रों में दिए गए उपाय करने की कोशिश करें।
कृतिका
उत्तरा फाल्गुनी
उत्तराषाढा
साथ ही सूर्य को अर्घ्य दें और सूर्याष्टकम और सूर्य के अन्य स्तोत्र आदि का पाठ करें।
गेहूँ के आटे का दिया, शुद्ध घी से शिवालय में सूर्योदय पर जलायें।
यग्योपवीत धारण करते हैं तो त्रिकाल नही तो यथा शक्ति सन्ध्या आदि करें।
बाँकी ग्रहों चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु आदि पर क्रमशः प्रदीन लिखती रहूँगी ताकि आप इसका लाभ ले सकें और इस सावन महादेब की आराधना के साथ साथ अपने ग्रहों के शुभ प्रभाव प्राप्त करने का भी प्रयास करें।