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रविवार, 9 जुलाई 2023

सोमवार व्रत क्यों/कैसे करें-

 


     सोमवार व्रत क्यों/कैसे करें-


भगवान शिव श्रावण के सोमवार के बारे में कहते हैं- 


“मत्स्वरूपो यतो वारस्ततः सोम इति स्मृतः। 

प्रदाता सर्वराज्यस्य श्रेष्ठश्चैव ततो हि सः। 

समस्तराज्यफलदो वृतकर्तुर्यतो हि सः।।”


अर्थात सोमवार मेरा ही स्वरूप है, अतः इसे सोम कहा गया है। इसीलिये यह समस्त राज्य का प्रदाता तथा श्रेष्ठ है। व्रत करने वाले को यह सम्पूर्ण राज्य का फल देने वाला है। भगवान शिव यह भी आदेश देते हैं कि श्रावण में 


“सोमे मत्पूजा नक्तभोजनं” 


अर्थात सोमवार को मेरी पूजा और नक्तभोजन करना चाहिए। पूर्वकाल में सर्वप्रथम श्रीकृष्ण ने ही इस मंगलकारी सोमवार व्रत को किया था।


“कृष्णे नाचरितं पूर्वं सोमवारव्रतं शुभम्”

स्कंदपुराण के अनुसार सूत जी कहते हैं-


स्कंदपुराण के अनुसार सूत जी कहते हैं-


शिवपूजा सदा लोके हेतुः स्वर्गापवर्गयोः ।। 

सोमवारे विशेषेण प्रदोषादिगुणान्विते ।।

केवलेनापि ये कुर्युः सोमवारे शिवार्चनम् ।। 

न तेषां विद्यते किंचिदिहामुत्र च दुर्लभम् ।।

उपोषितः शुचिर्भूत्वा सोमवारे जितेंद्रियः ।। 

वैदिकैर्लौकिकैर्वापि विधिवत्पूजयेच्छिवम् ।।

ब्रह्मचारी गृहस्थो वा कन्या वापि सभर्त्तृका।। 

विभर्तृका वा संपूज्य लभते वरमीप्सितम्।।

                                     3.3.8.10


प्रदोष आदि गुणों से युक्त सोमवार के दिन शिव पूजा का विशेष महात्म्य है। जो केवल सोमवार को भी भगवान शंकर की पूजा करते हैं, उनके लिए इहलोक और परलोक में कोई भी वस्तु दुर्लभ नहीं। सोमवार को उपवास करके पवित्र हो इंद्रियों को वश में रखते हुए वैदिक अथवा लौकिक मंत्रों से विधिपूर्वक भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। ब्रह्मचारी, गृहस्थ, कन्या, सुहागिन स्त्री अथवा विधवा कोई भी क्यों न हो, भगवान शिव की पूजा करके मनोवांछित वर पाता है।


शिवपुराण, कोटि रुद्रसंहिता के अनुसार-


निशि यत्नेन कर्तव्यं भोजनं सोमवासरे । 

उभयोः पक्षयोर्विष्णो सर्वस्मिञ्छिव तत्परैः ।।


दोनों पक्षों में प्रत्येक सोमवार को प्रयत्नपूर्वक केवल रात में ही भोजन करना चाहिए। शिव के व्रत में तत्पर रहने वाले लोगों के लिए यह अनिवार्य नियम है।


अष्टमी सोमवारे च कृष्णपक्षे चतुर्दशी।। 

शिवतुष्टिकरं चैतन्नात्र कार्या विचारणा।।


सोमवार की अष्टमी तथा कृष्णपक्ष चतुर्दशी इन दो तिथियों को व्रत रखा जाए तो वह भगवान शिव को संतुष्ट करने वाला होता है, इसमें अन्यथा विचार करने की आवश्यकता नहीं है।


"सोमवारे प्रधानः स्यात्सायंकालः प्रकीर्तितः"


स्कन्दपुराण के अनुसार  मुख्य रूप से सोमवार को सांयकाल में पूजा की जानी चाहिए। सोमवार को चंद्र उदय के समय की गई महादेव की पूजा बहुत ही शुभ और कल्याणकारी है।


शुक्रवार, 7 जुलाई 2023

शिव ध्यान मंत्र

 शिव ध्यान मंत्र


शङ्खेन्द्वाभमतीवसुन्दरतनुं 

शार्दूलचर्माम्बरं कालव्यालकराल

भूषणधरं गङ्गाशशाङ्कप्रियम्।

काशीशं कलिंकल्मषौघशमनं

कल्याणकल्पद्रुमं नौमीड्यं गिरिजापतिं

गुणनिधिं कन्दर्पहं शंकरम् ॥


शङ्ख और चन्द्रमा की कान्ति के अत्यन्त सुन्दर शरीर वाले, व्याघ्रचर्म के वस्त्र पहनने वाले, काल के समान (अथवा काले रंग के) भयानक सर्पों का भूषण धारण करने वाले, गङ्गा और चन्द्रमा को प्रेम करने वाले, काशीपति, कलियुग जनित पाप समूह का नाश करने वाले, कल्याण के कल्पवृक्ष, गुणों के निधान और कामदेव को भस्म करने वाले पार्वतीपति वन्दनीय श्री शंकरजी को मैं नमस्कार करता/करती हूँ।

रविवार, 2 जुलाई 2023

श्रीरुद्रद्वादशनामस्तोत्रं

 श्रीरुद्रद्वादशनामस्तोत्रं 


प्रथमं तु महादेवं द्वितीयं तु महेश्वरम् । 

तृतीयं शङ्करं प्रोक्तं चतुर्थं वृषभध्वजम् ॥ १॥


 पञ्चमं कृत्तिवासं च षष्ठं कामाङ्गनाशनम् ।

 सप्तमं देवदेवेशं श्रीकण्ठं चाष्टमं तथा ॥ २॥


 नवमं तु हरं देवं दशमं पार्वतीपतिम् ।

 रुद्रमेकादशं प्रोक्तं द्वादशं शिवमुच्यते ॥ ३॥


फलश्रुति

एतद्वादशनामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः ।

 गोघ्नश्चैव कृतघ्नश्च भ्रूणहा गुरुतल्पगः ॥ ४॥

 स्त्रीबालघातकश्चैव सुरापो वृषलीपतिः ।

सर्वं नाशयते पापं शिवलोकं स गच्छति ॥ ५॥

 शुद्धस्फटिकसङ्काशं त्रिनेत्रं चन्द्रशेखरम् ।

 इन्दुमण्डलमध्यस्थं वन्दे देवं सदाशिवम् ॥ ६॥ 


॥ इति श्रीरुद्रद्वादशनामस्तोत्रं सम्पूर्णम्॥