~चंद्रमा~
व्यक्ति के जन्म के समय ग्रहों की स्थिति ही उसकी कुंडली बन जाती है जैसे कि फ़ोटो खींच लिया हो और एडिट करना सम्भव नही है। इसे ही "लग्न" कुंडली कहते हैं।
लग्न के समय ग्रहों की इस स्थिति से ही जीवन भर आपको किस ग्रह की ऊर्जा कैसे प्रभावित करेगी का निर्धारिण होता है। साथ साथ दशाएँ, गोचर इत्यादि चलते हैं पर लग्न कुंडली का रोल सबसे महत्वपूर्ण है।
पृथ्वी से अरबों खरबों दूर ये ग्रह अपनी ऊर्जा से पृथ्वी/व्यक्ति को प्रभावित करते हैं जैसे हमारे सबसे निकट का ग्रह चंद्रमा जोकि जलतत्व का कारक है पृथ्वी और शरीर के जलतत्व पर पूर्ण प्रभाव रखता है।
पूर्णिमा में उछाल मारता समुद्र का जल इसकी ऊर्जा के प्रभाव को दिखाता है वहीं अमावस्या में ऊर्जा का स्तर कम होने पर वही समुद्र शांत होकर पीछे चला जाता है। जिसे ज्वार-भाटा कहते हैं। इसी तरह अन्य ग्रहों की ऊर्जा के प्रभाव होते हैं जिन्हें यहां समझाना संभव नहीं।
चंद्रमा की ये ऊर्जा, इस समय शरीर को (अगर खराब है) water retention, बैचेनी, बहुत प्यास लगने विशेषकर रात में, नींद न आना आदि लक्षण दिखाती है।
तो इस सावन कैसे करें कुंडली मे चंद्र ग्रह के उपाय-
◆सोमवार का व्रत रखें।
◆शाम को शिवालय में कच्चे गाय के दूध से।महादेव का अभिषेक करिए, पतली धारा जोकि दूध बर्तन में रहे तक न टूटे।
◆अगर चांदी के बर्तन से दूध या जल से अभिषेक करें तो और भी शुभ है
◆ जल में गंगाजल व शुद्ध मिश्री मिलाएं।
◆सफेद फूलों जैसे अपराजिता, सफेद गुड़हल आदि से और "नमः शिवाय" कहते हुए 27/108 यथाशक्ति बेलपत्रों से अर्चन करें।
◆ज्योतिष में चंद्रमा चराचर जगत की माता कहा गया है, प्रेम और समर्पण के साथ पूजा करिए, माँ की तरह चंद्रमा भी आपकी हर तरह से रक्षा करेंगे।
◆माँ व माँ समान स्त्रियों का सम्मान करें।कटुवाणी अपशब्द न बोलें।
◆अगर शुभ भावों का स्वामी है तो दान आदि न करें, अन्यथा चंद्रमा के गुण वाली सामग्री का दान भी करें।
◆ रोगों की स्थिति में चंद्रशेखराष्टक और चंद्रमा के मंत्रों का पाठ/जप करें।
◆पूर्णिमा का उपवास करें, और इस दिन चंद्र को अर्घ्य भी दें।