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सोमवार, 3 जुलाई 2023

मंगला गौरी स्तोत्रं

 मंगला गौरी स्तोत्रं


रक्ष-रक्ष जगन्माते देवि मङ्गल चण्डिके।

हारिके विपदार्राशे हर्षमंगल कारिके ।।

हर्षमंगल दक्षे च हर्षमंगल दायिके ।

शुभेमंगल दक्षे च शुभेमंगल चंडिके।।

मंगले मंगलार्हे च सर्वमंगल मंगले ।

सता मंगल दे देवि सर्वेषां मंगलालये ||

पूज्ये मंगलवारे च मंगलाभिष्ट देवते।

पूज्ये मंगल भूपस्य मनुवंशस्य संततम्।।

मंगला धिस्ठात देवि मंगलाञ्च मंगले |

संसार मंगलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम्।।

देव्याश्च मंगलंस्तोत्रं यः श्रृणोति समाहितः ।

प्रति मंगलवारे च पूज्ये मंगल सुख-प्रदे ।।

तन्मंगलं भवेतस्य न भवेन्तद्-मंगलम्।

वर्धते पुत्र-पौत्रश्च मंगलञ्च दिने - दिने ।।

मामरक्ष रक्ष-रक्ष ॐ मंगल मंगले ।

।। इति मंगलागौरी स्तोत्रं सम्पूर्ण ।।

कन्या के शीघ्र विवाह के लिए करें सावन में ये उपाय


कन्या के शीघ्र विवाह के लिए करें सावन में ये उपाय

श्रावण मास के मंगलवार को मंगलागौरी व्रत का विधान किया जाता है इस व्रत को नवविवाहित स्त्रियां 5 वर्ष के लिए करने का संकल्प लेती हैं। यह व्रत अखंड सौभाग्यदायक और सुख संतान की प्राप्ति करने वाला कहा गया है।

वे कन्याएं जिनकी कुंडली मे सप्तम भाव से सम्बंधित दोष आदि कहे जाते हैं, विवाह होने में देरी हो रही हो, विवाह सुख में बाधा जैसे दोष कुंडली मे देखे गए हों तो ऐसे में भी कन्याओं के द्वारा विवाह संबंधी दोष के निवारण के लिए "मंगलागौरी" व्रत किया जाता है।

इस व्रत को पांच,नौ, ग्यारह वर्ष तक करने का संकल्प लें, और सावन के प्रत्येक मंगलवार को विधिवत माता गौरी की पूजा करें। 16 दीपक, 16 फल, 16 श्रृंगार, सप्तमेवे और सप्तधान्य की 16-16 ढेरियों को रख, देवी गौरी का विभिन्न सामग्री से 16-16 बार अर्चन करें। व्रत की समाप्ति के दिन सोलह सौभाग्वती स्त्रियों को बुलाकर भोजन कराएं, यथाशक्ति दक्षिणा व सौभाग्य सामाग्री देकर आशीर्वाद लें।


माँ सीता के द्वारा माँ पार्वती स्तुति


जय जय गिरिराज किसोरी।
जय महेस मुख चंद चकोरी॥
जय गजबदन षडानन माता।
जगत जननि दामिनी दुति गाता॥
देवी पूजि पद कमल तुम्हारे।
सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे॥
मोर मनोरथ जानहु नीकें।
बसहु सदा उर पुर सबही के॥
कीन्हेऊं प्रगट न कारन तेहिं।
अस कहि चरन गहे बैदेहीं॥
बिनय प्रेम बस भई भवानी।
खसी माल मुरति मुसुकानि॥
सादर सियं प्रसादु सर धरेऊ।
बोली गौरी हरषु हियं भरेऊ॥
सुनु सिय सत्य असीस हमारी।
पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥
नारद बचन सदा सूचि साचा।
सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा॥

मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु
सहज सुंदर सांवरो।
करुना निधान सुजान सीलु
सनेहु जानत रावरो॥

एही भांती गौरी असीस सुनी
सिय सहित हियं हरषीं अली।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि
मुदित मन मंदिर चली॥

जय जय गिरिबरराज किसोरी।
जय महेस मुख चंद चकोरी।।
जय गजबदन षडानन माता।
जगत जननि दामिनि दुति गाता।।
नहिं तव आदि मध्य अवसाना।
अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना।।
भव भव विभव पराभव कारिनि।
बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि।।

[दोहा]
पतिदेवता सुतीय महुँ,
मातु प्रथम तव रेख।
महिमा अमित न सकहिं कहि,
सहस सारदा सेष।।

सेवत तोहि सुलभ फल चारी।
बरदायिनी पुरारि पिआरी।।
देबि पूजि पद कमल तुम्हारे।
सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे।।
मोर मनोरथु जानहु नीकें।
बसहु सदा उर पुर सबहिं कें।।
कीन्हेउँ प्रगट न कारन तेहीं।
अस कहि चरन गहे बैदेहीं।।
बिनय प्रेम बस भई भवानी।
खसी माल मूरति मुसुकानी।।
सादर सियँ प्रसादु सिर धरेऊ।
बोली गौरि हरषु हियँ भरेऊ।।
सुनु सिय सत्य असीस हमारी।
पूजिहि मन कामना तुम्हारी।।
नारद बचन सदा सुचि साचा।
सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा।।

[छंद]
मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु,
सहज सुंदर साँवरो।
करुना निधान सुजान सीलु,
सनेहु जानत रावरो।।
एहि भाँति गौरि असीस सुनि सिय,
सहित हियँ हरषीं अली।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि,
मुदित मन मंदिर चली।।

[सोरठा]
जानि गौरि अनुकूल सिय,
हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल,
बाम अंग फरकन लगे।।


कुंडली मे विवाह बाधा के उपाय

सावन के पहले दिन रामचरितमानस के मासिक पारायण का संकल्प लें।

सुनु सिय सत्य असीस हमारी।
पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥

चौपाई से सम्पुटित का पाठ करें, नित्य 1-2 घंटे एक निश्चित समय पर पाठ करें, पंडित जी बुलाने से वो पाठ विधिवत शुरू कर देंगे, और पाठ पूर्ण होने पर विधिवत समापन भी कर देंगे। 

कन्या के विवाह में आने वाली बाधाओं के निवारण के लिए ये विधान मेरे अनुभव में अवश्य फल देने वाला देखा गया है।


उक्त मंत्र की कम से कम 5 मालाएँ प्रतिदिन करें


ऊपर अयोध्याकांड से सीता जी द्वारा गौरी पूजा की वंदना दी गयी है सुबह शाम इसका भी पाठ करें।


सुख सौभाग्य की देवी, शिवप्रिय "गौरी" माता आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेंगी।