शनिवार, 12 अगस्त 2023

बिच्छू के ज़हर का अचूक उपाय

 Remedy for Scorpion Sting


    ~बिच्छू के ज़हर का अचूक उपाय~


पिछले तीन दिन में बिच्छू द्वारा काटे जाने पर मेरे पास दो फ़ोन आये, बारिश का मौसम, खासकर गांव देहात में ही नही शहरों  में भी बिच्छू आदि का डर आजकल बना रहता है।

तो ईश्वर का नाम लेकर इसकी एक अचूक दवा मैं आज आप लोगों को बताऊंगी। 

इमली का बीज लेकर उसे बीच से फोड़कर दो भागों में बांट ले, अब सफेद भाग यानी उस टुकड़े के अंदरुनी भाग को, थोड़ा सा पानी डालकर एक साफ पत्थर पर घिसें, पिसे हुए काजू की तरह की लुगदी सी बन जाएगी, बस अब इसे पोछे बिना ऐसे ही बिच्छू के कटे हुए स्थान पर चिपका दें।

अब अगर वो व्यक्ति मैराथन भी दौड़ लेगा न, तो ये बीज तब तक नही छूटेगा, जब तक कि पूरा विष नही खींच लेगा।

जलन में तुरंत आराम मिलेगा ही और कुछ घंटों में ज़हर खींच कर यर बीज भी खुद ही गिर जाएगा।

मैने इसे स्वयं प्रयोग करके देखा तभी लिख रही हूं, अधिकतर मेरे बताए हुए उपाय मानकर चलिए अनुभूत ही होते हैं।


विष के प्रकार या वर्गीकरण पर मुझे जानकारी नही है थोड़ा जानने का प्रयास किया तो था जिससे लगता है कि ये बीज का उपाय शायद न्यूरोटॉक्सिक विष पर  कार्य करता है, मैंने इसका प्रयोग केवल बिच्छू के डंक पर ही सफलतापूर्वक किया है।

मंगलवार, 18 जुलाई 2023

मंगल की महादशा में विभिन्न ग्रहों की अंतर दशाओं के दुष्प्रभावों का शिव पूजा/ अनुष्ठान से निवारण।

 

मंगल

मंगल की महादशा में विभिन्न ग्रहों की अंतर 

दशाओं के दुष्प्रभावों का शिव पूजा/ अनुष्ठान 

से निवारण।

◆मंगल की महादशा में, मंगल की अन्तर्दशा में 

रुद्र-जप तथा वृषभदान करना चाहिये।

◆राहु की अन्तर्दशा होने पर नाग का दान, ब्राह्मण 

भोजन तथा मृत्युंजय मन्त्र जप कराने से आयु एवं 

आरोग्य की प्राप्ति होती है।

नागदानं प्रकुर्वीत देवब्राह्मणभोजनम् ।
मृत्युंजयजपं कुर्यादायुरारोग्यमादिशेत् ॥


मंगल में बृहस्पति की खराब अन्तर्दशा होने पर
शिवसहस्रनामावली का जप करना चाहिये।

'तद्दोष-परिहारार्थं शिवसाहस्त्रकं जपेत् ।'

इसी प्रकार शनि की दोषयुक्त अन्तर्दशा में मृत्युंजय 

मन्त्र के जप का विधान है।

सोमवार, 17 जुलाई 2023

सोमवती अमावस्या- पितृदोष व कालसर्प दोष से सम्बंधित उपाय करें

 


               सोमवती अमावस्या 

पितृदोष व कालसर्प दोष से सम्बंधित उपाय करें


सोमवती अमावस्या को सूर्यग्रहण के समान फलदायी कहा गया है, इस दिन किया गया स्नान, दान, जप, तर्पण आदि अनंत गुणा फल देता है।


अमावास्या तु सोमेन सप्तमी भानुना सह।

चतुर्थी भूमिपुत्रेण सोमपुत्रेण चाष्टमी।।

चतस्रस्तिथयो स्त्वेताः सूर्यग्रहण सन्निभाः।

स्नानं दानं तथा श्राद्धं सर्वं तत्राक्षयं भवेत्।।


सोमवारी अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी एवं बुधवारी अष्टमी तिथीयां सूर्यग्रहण के समान फल देने वाली कही गयी हैं। इन तिथियों में किया गया स्नान, दान, जप, तर्पण आदि अनंतकोटि फलदायी कहा गया है।

इस दिन पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान करना विशेष शुभ कहा गया है।


वे जो पितृदोष से पीड़ित है आज पीपल 108 परिक्रमा "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र के साथ करें, अर्घ्य जनेऊ अर्पित करें।


वे जो पितृ कर्म के कर्तव्य में बंधे हैं प्रत्येक अमावस्या को अवश्य  तर्पण आदि नियमों का पालन करें, आज तो परम पुण्यकारी सोमवती अमावस्या है आप स्वयं नही कर पा रहें है तो ब्राह्मण को बुलाकर विधि विधान से कर्तव्य का निर्वहन करें। याद रहे देव पूजा भाव प्रधान है पर पितृसत्ता के निमित्त किया जाने वाला कारक नियमपूर्वक व विधि विधान से किया जाना चाहिये। केवल इस कार्य से आप देखेंगे कि आप की बहुत सारी समस्याओं का स्वतः ही समाधान हो जाएगा। समय के साथ साथ अंतर महसूस होगा आपको।


आज सौभाग्वती स्त्रियों के द्वारा तुलसी/पीपल की परिक्रमा कर सौभाग्यकारक शिव-पार्वती पूजा का विधान भी किया जाता है। जिसमे 108 परिक्रमा किन्ही 108 वस्तुओं फल, मेवे, सौभाग्य सामाग्री इत्यादि से पूर्ण कर, पूजा आदि कर, सभी वस्तुएँ सौभाग्यशाली स्त्री/ ब्राह्मणी को दे दी जाती हैं।


श्री शिव अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र

 श्री शिव अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र


इस स्तोत्र का केवल एक पाठ शतरुद्री के तीन पाठों के समान फल देने वाला कहा गया है।


पार्वत्युवाच

शरीरार्धमहं शम्भोर्येन प्राप्स्यामि केशव ।

तदिदानीं समाचक्ष्व स्तोत्रं शीघ्रफलप्रदम् ॥


नारायण उवाच

अस्ति गुह्यतमं गौरि नाम्नामष्टोत्तरं शतम् ।

शम्भोरहं प्रवक्ष्यामि पठतां शीघ्रकामदम् ॥


विनियोग – 

'ॐ अस्य श्रीशिवाष्टोत्तरशतदिव्यनामामृत-स्तोत्रमालामन्त्रस्य नारायण ऋषिरनुष्टुप् छन्दः श्रीसदाशिवः परमात्मा देवता श्रीसदाशिवप्रीत्यर्थे जपे विनयोगः ।'


शिवसंकल्प इति हृदयम् । 

पुरुषसूक्तमिति शिरः ।

उत्तरनारायणेति शिखा ॥ 

अप्रतिरथेति कवचम् ।

विभ्राडिति नेत्रम् । 

शतरुद्रियमित्यस्त्रम् । 

आत्मानं रुद्ररूपं ध्यायेत् । 


(इन सूक्तों का पाठ करते हुए न्यास करे।)


ध्यान-

धवलवपुषमिन्दोर्मण्डले संनिविष्टं 

भुजगवलयहारं भस्मदिग्धाङ्गमीशम् ।

चारुचन्द्रार्धमौलिं हरिणपरशुपाणिं

हृदयकमलमध्ये संततं चिन्तयामि ॥

'चन्द्रमण्डल में श्री शिवजी विराजमान हैं, उनका गौर शरीर है, सर्प का ही कंगन तथा सर्प का ही हार पहने हुए हैं तथा शरीरमें भस्म लगाये हुए हैं, उनके हाथों में मृगी मुद्रा एवं परशु है और अर्धचन्द्र सिर पर विराजमान है। मैं उन भगवान् शंकर का हृदय में निरंतर चिन्तन करता हूँ।'


शिवो महेश्वरः शम्भुः पिनाकी शशिशेखरः ।

वामदेवो विरूपाक्षः कपर्दी नीललोहितः ॥

शंकरः शूलपाणिश्च खट्वाङ्गी विष्णुवल्लभः ।

शिपिविष्टोऽम्बिकानाथः श्रीकण्ठो भक्तवत्सलः॥

भवः शर्वस्त्रिलोकेश: शितिकण्ठः शिवाप्रियः ।

उग्रः कपालिः कामारिरन्धका सुरसूदनः ॥

गङ्गाधरो ललाटाक्षः कालकालः कृपानिधिः ।

भीमः परशुहस्तश्च मृगपाणिर्जटाधरः ॥

कैलासवासी कवची कठोरस्त्रिपुरान्तकः ।

वृषाङ्को वृषभारूढो भस्मोद्धूलितविग्रहः ॥

सामप्रियः स्वरमयस्त्रयीमूर्तिरनीश्वरः ।

सर्वज्ञः परमात्मा च सोमसूर्याग्निलोचनः ॥

हविर्यज्ञमयः सोमः पञ्चवक्त्रः सदाशिवः ।

विश्वेश्वरो वीरभद्रो गणनाथः प्रजापतिः ॥

हिरण्यरेता दुर्धर्षो गिरीशो गिरिशोऽनघः |

भुजङ्गभूषणो भर्गो गिरिधन्वा गिरिप्रियः ॥

कृत्तिवासा पुरारातिर्भगवान् प्रमथाधिपः ।

मृत्युंजयः सूक्ष्मतनुर्जगद्व्यापी जगद्गुरुः ॥

व्योमकेशो महासेनजनकश्चारुविक्रमः ।

रुद्रो भूतपतिः स्थाणुरहिर्बुध्न्यो दिगम्बरः ॥

अष्टमूर्तिरनेकात्मा सात्त्विकः शुद्धविग्रहः ।

शाश्वतः खण्डपरशुरजपाशविमोचकः ॥

मृडः पशुपतिर्देवो महादेवोऽव्ययः प्रभुः ।

पूषदन्तभिदव्यग्रो दक्षाध्वरहरो हरः ॥

भगनेत्रभिदव्यक्तः सहस्त्राक्षः सहस्त्रपात् ।

अपवर्गप्रदोऽनन्तस्तारकः परमेश्वरः ॥

एतदष्टोत्तरशतनाम्नामाम्नायेन सम्मितम् ।

विष्णुना कथितं पूर्वं पार्वत्या इष्टसिद्धये ॥

शंकरस्य प्रिया गौरी जपित्वा त्रैकालमन्वहम् ।

नोदिता पद्मनाभेन वर्षमेकं प्रयत्नतः ॥

अवाप सा शरीरार्धं प्रसादाच्छूलधारिणः ।

यस्त्रिसंध्यं पठेच्छम्भोर्नाम्नामष्टोत्तरं शतम् ॥

शतरुद्रित्रिरावृत्त्या यत्फलं प्राप्यते नरैः ।

तत्फलं प्राप्नुयादेतदेकवृत्त्या जपन्नरः ॥

बिल्वपत्रैः प्रशस्तैर्वा पुष्पैश्च तुलसीदलैः ।

तिलाक्षतैर्यजेद् यस्तु जीवन्मुक्तो न संशयः ॥

नाम्नामेषां पशुपतेरेकमेवापवर्गदम् ।

अन्येषां चावशिष्टानां फलं वक्तुं न शक्यते ॥


।।इति श्री शिवरहस्ये गौरीनारायण संवादे शिवाष्टोत्तरशत दिव्यनामामृत स्तोत्रं सम्पूर्णम्।।


इस प्रकार १०८ नाम, जो वेद के तुल्य हैं, श्री विष्णु ने पहले इष्ट-सिद्धि-हेतु माता पार्वती को बताये थे । शंकरप्रिया भगवती गौरी ने भगवान् पद्मनाभ की प्रेरणा से एक वर्ष तक प्रतिदिन त्रिकाल इस का जप किया। महादेव की कृपा से उन्होंने उनका शरीरार्ध प्राप्त किया। शतरुद्री के तीन बार पाठ करने से जो फल मनुष्य को प्राप्त होता है, वह फल इस स्तोत्र मात्र एक बार के पाठ करने से प्राप्त हो जाता है। 

बेलपत्र, फूल, तुलसीदल से, तिल तथा अक्षत से जो महादेव का यजन करते हैं, वे जीवन्मुक्त हो जाते हैं, इसमें संदेह नहीं । भगवान् शंकर के इन शतनामों में से केवल एक नाम ही मोक्ष देनेववाला है तो शतनाम का महत्त्व (फल) वर्णन ही नही किया जा सकता है।


शनिवार, 15 जुलाई 2023

शनि प्रदोष व्रत पूर्ण शास्त्रोक्त विधान

 


                शनि प्रदोष 


यदा त्रयोदशी कृष्णा सोमवारेण संयुता ।

यदा त्रयोदशी शुक्ला मन्दवारेण संयुता ॥

तदातीव फलं प्राप्तं धनपुत्रादिकं लभेत् ।

                                           "हेमाद्रि"


हेमाद्रि के अनुसार अगर त्रयोदशी तिथी कृष्ण पक्ष में सोमवार के दिन हो अथवा शुक्लपक्ष के मंद अर्थात शनिवार को हो, तो इस दिन किये गए व्रत पूजा आदि से धन सम्पदा और संतान सुख (कुलवृद्धि) की प्राप्ति होती है।


यदा त्रयोदशी शुक्ला मन्दवारेण संयुता ।

आरब्धव्यं व्रतं तत्र संतानफलसिद्धये ॥

                                        "मदनरत्न"


मदनरत्न में भी वर्णित है कि शुक्लपक्ष में शनिवार को पढ़ने वाला प्रदोष व्रत संतान सुख की प्राप्ति कराता है।


प्रदोषव्रत को अलग अलग दिन में आने से इसका महत्व और अधिक हो जाता है केवल प्रदोष व्रत करके भी ग्रह जनित पीड़ाओं से मुक्ति मिलती है। 

प्रदोष काल मे शिव परिवार( महादेव, अम्बिका, षडानन, गणपति, नंदी और कीर्तिमुख) का पूजन करें, मिट्टी के अभाव में हल्दी/रोली से बनाकर यथाशक्ति पंच/दश/षोडशोपचार पूजा करें, उसके बाद किसी तालाब या क्यारी में इनका विसर्जन कर दें।


शिवालय में इस दिन 108 घी के दीपक लगाए, प्रयास करें मिट्टी के दिये हों अन्यथा आटे से दिए बनाकर, शिवलिंग के समक्ष दिए लगाए, परिक्रमा करें।


सौभाग्वती स्त्रियाँ गौरी जी को श्रृंगार चढ़ाकर किसी भी सौभाग्यवती स्त्री (पुजारी परिवार/मान पक्ष) को दे सकती हैं।


शनि साढ़ेसाती से प्रभावित व्यक्ति भी कल पूजा करें, शिवालय में शनि ग्रहजनित पीड़ा के निवारण के लिए दीपदान करें, कुंडली में कुपित (अगर योगकारक नही है) शनि के लिए कल शनि ग्रह की कारक सामग्री का दान करें। क्योंकि शनिवार व त्रयोदशी के साथ साथ अनुराधा नक्षत्र भी है।