शनि प्रदोष
यदा त्रयोदशी कृष्णा सोमवारेण संयुता ।
यदा त्रयोदशी शुक्ला मन्दवारेण संयुता ॥
तदातीव फलं प्राप्तं धनपुत्रादिकं लभेत् ।
"हेमाद्रि"
हेमाद्रि के अनुसार अगर त्रयोदशी तिथी कृष्ण पक्ष में सोमवार के दिन हो अथवा शुक्लपक्ष के मंद अर्थात शनिवार को हो, तो इस दिन किये गए व्रत पूजा आदि से धन सम्पदा और संतान सुख (कुलवृद्धि) की प्राप्ति होती है।
यदा त्रयोदशी शुक्ला मन्दवारेण संयुता ।
आरब्धव्यं व्रतं तत्र संतानफलसिद्धये ॥
"मदनरत्न"
मदनरत्न में भी वर्णित है कि शुक्लपक्ष में शनिवार को पढ़ने वाला प्रदोष व्रत संतान सुख की प्राप्ति कराता है।
प्रदोषव्रत को अलग अलग दिन में आने से इसका महत्व और अधिक हो जाता है केवल प्रदोष व्रत करके भी ग्रह जनित पीड़ाओं से मुक्ति मिलती है।
प्रदोष काल मे शिव परिवार( महादेव, अम्बिका, षडानन, गणपति, नंदी और कीर्तिमुख) का पूजन करें, मिट्टी के अभाव में हल्दी/रोली से बनाकर यथाशक्ति पंच/दश/षोडशोपचार पूजा करें, उसके बाद किसी तालाब या क्यारी में इनका विसर्जन कर दें।
शिवालय में इस दिन 108 घी के दीपक लगाए, प्रयास करें मिट्टी के दिये हों अन्यथा आटे से दिए बनाकर, शिवलिंग के समक्ष दिए लगाए, परिक्रमा करें।
सौभाग्वती स्त्रियाँ गौरी जी को श्रृंगार चढ़ाकर किसी भी सौभाग्यवती स्त्री (पुजारी परिवार/मान पक्ष) को दे सकती हैं।
शनि साढ़ेसाती से प्रभावित व्यक्ति भी कल पूजा करें, शिवालय में शनि ग्रहजनित पीड़ा के निवारण के लिए दीपदान करें, कुंडली में कुपित (अगर योगकारक नही है) शनि के लिए कल शनि ग्रह की कारक सामग्री का दान करें। क्योंकि शनिवार व त्रयोदशी के साथ साथ अनुराधा नक्षत्र भी है।
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