🔴Astrology&Remedies🔴
राहु महादशा, अंतर/गोचर उपाय
1- शनिवार (आज) शाम को अलसी के तैल और लाल मौली/कलावे की बत्ती का चौमुखा दीपक, शिवालय में लगाएं।
2- दुर्गा स्तोत्र चालीसा जो भी हो पाठ करें।
3- बेल पत्र, विजया/भाँग पत्र, विष्णुकांता के फूलों से शिवलिंग का अर्चन करें।
4- सरस्वती मंत्र का जप करें।
5 मेडिटेशन करें, सार्वजनिक स्थानों की तो कर नही सकते तो धार्मिक स्थलों में सफाई करें।
राहु का वैदिक स्वरूप बिना धड़ का सिर है, मतलब राहु का प्रभाव सबसे पहले आपकी सोच/मस्तिष्क पर पड़ता है। अगर राहु के कुप्रभाव हैं तो मानसिक उलझन, निर्णय लेने की क्षमता में कमी, बहुत ज्यादा कंफ्यूज़न, रात में नीद न आना, आदि कुछ लक्षण हैं। स्क्रीन/सोशल मीडिया में जरूरत से ज्यादा समय देना भी राहु को और खराब करता है, ये आप पर निर्भर करता है कि आप सोशल-मीडिया या फ़ोन पर ज्ञानवर्धक चीज़े या किताबें/pdf पढ़ेंगे या फालतू रील्स देखने में वक्त बर्बाद करेंगे।
मतलब मस्तिष्क और सोच को स्वच्छ रखिये, मेडिटेशन करिए, एक्सरसाइज करिए, स्तोत्र मंत्रो का पाठ करिए, मंत्रों का पाठ भी मानसिक और भावनात्मक बल देता है।
एक बात और पानी की बर्बादी का कारण मत बनिये, पानी ज्योतिष में चंद्रमा अर्थात मन का कारक कहा गया है, इसलिए राहु का दुष्प्रभाव होने पर अक्सर घर मे पानी के स्तोत्र से पानी बहना शुरू हो जाता है। बार बार सही करने के बाद भी नल टपकते रहते हैं। मतलब चंद्रमा/मन यानी शुद्ध पानी, राहु अर्थात अशुद्ध स्थान में बहकर पहुंच रहा है। जैसे जैसे ये बढ़ेगा वैसे वैसे चंद्रमा कमज़ोर होगा और राहु का कंफ्यूज़न भी बढ़ता जाएगा जातक पर।
अगर कुंडली मे राहु के दुष्प्रभाव हैं और आप महादशा, गोचर से निकल रहे हैं तो बार बार एक सी गलतियां होना, एक लूप सा बन जाता है जिसमे व्यक्ति गोल गोल घूमता रहता है। वहीं शुभ प्रभाव में राहु अनायास यश,कीर्ति, धन, पद की प्राप्ति का कारण बनता है। कलयुग शुक्र व राहु प्रधान कहा गया है, जहाँ दिखावा/प्रपञ्च/स्वार्थ सन्यासियों को भी नही छोड़ रहा तो हम लोग तो सामान्य लोग हैं। इसलिए मन को मजबूत रखें राहु यानी भ्रम का मात्र एक ही उपाय है ज्ञान, सरस्वती साधना शिक्षा, गीतसंगीत, वाद्ययंत्रों का प्रयोग करें। जरूरी नही धार्मिक पर मीनिंगफुल किताबें पढ़ें, सस्ते साहित्य और वीडिओज़ से दूरी बनाएं
जयतु सनातन🚩
क्या राहु को सर्प का सिर भाग समझा जा सकता है?
जवाब देंहटाएंयदि हाँ तो महादेव और उनके साथ विराजमान
वासुकी देव (सर्प) का पूजन से राहु दोष कम या समाप्त किया जा सकता है??