गुरुवार, 29 जून 2023

मंत्र और ब्रह्मांड की ऊर्जा

 

🔴मंत्र और ब्रह्मांड की ऊर्जा🔴 ~रामरक्षास्तोत्र के कवच की तरह प्रयोग विधि~ मंत्रों में अलौकिक शक्ति है जो पिण्ड(शरीर) को ब्रह्मांड की असीमित ऊर्जा से जोड़ता है। विशेष मंत्रों द्वारा (सम्बंधित देवी/देवता) आवश्यकता अनुरूप ऊर्जा प्राप्त करने के लिए अलग अलग विधान हैं। उस असीमित ऊर्जा से अपने निमित्त आवश्यकता अनुसार ऊर्जा को ग्रहण करने के लिए मंत्र व मंत्रों के विधान कहे गए हैं। इस महामारी के समय आज सभी के लिये अनुकूल और प्रभावशाली "श्री रामरक्षास्तोत्रं" की बात करते हैं। श्रीहरि के अवतारों को विभिन्न ग्रहों से भी जोड़ा जाता है। राम अवतार का सम्बंध "सूर्य"से है। सूर्य ज्योतिष में प्राण ऊर्जा का केंद्र, ग्रहों में राजा, मस्तिष्क और हृदय दोनों पर प्रभाव रखता है। कई बार आपने सुना होगा कि उग्र मंत्रों/बजरंग बाण/उग्र नरसिंह भगवान आदि अनेक ऊर्जावान मंत्रों के प्रयोग और पूजा के लिए मना किया जाता है। क्यों? क्योंकि इनके जप से शरीर मे मंत्र की प्रकृति अनुसार ऊर्जा उत्त्पन्न होती है जिससे ऐसे में साधक कई बार शरीर मे कम्पन्न, जलन और असहजता अनुभव करता है। जो उस मंत्र की आवृत्ति से शरीर को प्राप्त होती है। मतलब मंत्र आपको उस ऊर्जा से जोड़ रहा है। अदित्यहृदयस्तोत्र, शिवप्रोक्त सूर्याष्टकम और रामरक्षास्तोत्र का पाठ करें। ऑडियो के माध्यम या गुरु सानिध्य में सुनकर पहले उसका स्पष्ट उच्चारण सीखें क्योंकि मंत्र एक केस सेंसिटिव पासवर्ड की तरह है इसमें मात्रा, बिंदु, हलन्त/चंद्रकला आदि के स्पष्ट उच्चारण न होने पर (गलत पासवर्ड डालकर) आप कभी भी सम्बंधित ऊर्जा को अनलॉक नही कर पाएंगे। पहले पूरा पाठ करें फिर श्री रामरक्षास्तोत्र में केवल कवच वाले भाग को 5/7/9 बार कहे गए अंगों को छूते हुए पाठ करें। अंतर आप स्वयं अनुभव करेंगे। शिरो में राघवः पातु--------------विजयी विनयी भवेत। (श्लोक 4 से -----------श्लोक 10 तक) वो जो हृदय रोग या अन्य किसी भी रोग से पीड़ित हैं, जिनमे आत्मविश्वास की कमी है, घबराहट बहुत ज्यादा और जल्दी होने लगती है, निर्णय क्षमताएं, लीडरशिप क्षमता इस सब पर बहुत सकारात्मक प्रभाव होगा, इन मंत्र/स्त्रोतों के जप की आवृत्ति से उत्त्पन्न ऊर्जा शरीर के आंतरिक विकारों को भी खत्म करेगी। 1-गुलाबी/लाल ऊन का आसन लें और पूर्व दिशा की और मुँह करके बैठें। सूर्योदय के समय करें तो अति उत्तम अन्यथा 12 बजे से पहले ही कर ले। 2- बच्चों के लिए माता पिता कर सकते हैं पर सम्भव हो तो बच्चों को उस समय प्रणव का जप करने को कहें। नमः शिवाय🚩
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