शुक्रवार, 15 सितंबर 2023

श्री राधा कृत विघ्नाशक गणपति स्तोत्र

 ब्रह्मवैवर्तपुराण में सभी प्रकार के विघ्नों के निवारण के लिए श्री राधा जी कृत विघ्ननाशक गणपति स्तोत्र का वर्णन आता है।

श्री राधिका जी कहती हैं

जो परम धाम, परब्रह्म, परेश, परम ईश्वर, विघ्नोंके विनाशक, शान्त, पुष्ट, मनोहर और अनन्त हैं; प्रधान-प्रधान सुर, असुर और सिद्ध जिनका स्तवन करते हैं; जो देवरूपी कमलके लिये सूर्य और मंगलोंके आश्रय स्थान हैं, उन परात्पर गणेश की मैं स्तुति करती हूँ । यह उत्तम स्तोत्र महान् पुण्यमय तथा विघ्न और शोकको हरनेवाला है। जो प्रातः काल उठकर इस स्तोत्र का पाठ करता है, वह सम्पूर्ण विघ्नों से विमुक्त हो जाता है।


श्री राधिका उवाच 

परं धाम परं ब्रह्म परेशं परमीश्वरम् । 

विघ्ननिघ्नकरं शान्तं पुष्टं कान्तमनन्तकम् ॥

सुरासुरेन्द्रैः सिद्धेन्द्रैः स्तुतं स्तौमि परात्परम् । 

सुरपद्मदिनेशं च गणेशं मङ्गलायनम् ॥

इदं स्तोत्रं महापुण्यं विघ्नशोकहरं परम् । 

यः पठेत् प्रातरुत्थाय सर्वविघ्नात् प्रमुच्यते ॥


मंगलवार, 5 सितंबर 2023

कृष्ण जन्माष्टमी व्रत

 कृष्ण जन्माष्टमी व्रत


कब करें जन्माष्टमी व्रत?

क्यों आवश्यक है जन्माष्टमी व्रत, इसका महत्व?

कृष्ण जन्माष्टमी और जयंती में क्या है अंतर?


क्या आपको पता है सनातन धर्म के ग्रंथों में ऐसी चार महारात्रियों का वर्णन आता है जो सभी प्रकार की सिद्धि, साधना, मंत्र जप, स्तोत्रपाठ, होम आदि पूजा के विभिन्न माध्यमों से सभी प्रकार की मनोकामना को सिद्ध करने वाली कही गयी है।


1-दीपावली- कालरात्रि

2-महाशिवरात्रि- महारात्रि

3-जन्माष्टमी- मोहरात्रि

4-होलिका दहन- दारुण रात्रि


वैसे तो अनेकों ग्रंथों में अलग अलग प्रकार से इनका वर्णन किया गया है पर यहां में तंत्रोक्त देवी सूक्त के सातवें श्लोक का संदर्भ दे रही हूँ।


प्रकृतिस्त्वं च सर्वस्य गुणत्रयविभाविनी।

कालरात्रिर्महारात्रिर्मोहरात्रिश्च दारुणा।।7।।


अर्थ – तुम्हीं तीनो गुणों को उत्पन्न करने वाली सबकी प्रकृति हो. भयंकर कालरात्रि, महारात्रि और मोहरात्रि सहित दारुण रात्रि भी तुम्हीं हो।


श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को अत्यंत फलदायी और पापनाशी कहा गया है।


कृष्णजन्माष्टमी पूर्वा प्रसिद्धा पापनाशिनी ।

क्रतुकोटिसमा ह्येषा तीर्थानामयुतैः समा ।

कर्ता गवां सहस्रं तु यो ददाति दिनेदिने ।

तत्फलं समवाप्नोति जयंत्यां समुपोषणे ।


श्री कृष्ण "जयंती और जन्माष्टमी"  एक साथ होने का सुंदर संयोग भी है इस बार


कृष्णाष्टम्यां भवेद्यत्र कलैका रोहिणी यदि। 

जयन्ती नाम सा प्रोक्ता उपोष्या सा प्रयत्नतः।। 


केवल अष्टमी मात्र का विचार करने पर व्रत कृष्णाष्टमी कहलाता है, किन्तु रोहिणी नक्षत्र का विचार करते हुए यदि व्रत किया जाए, तो वह जयंती या जन्माष्टमी कहलाता है। इसलिए कई बार यह व्रत दो दिन मनाया जाता है।


यस्मिन् वर्षे जयन्त्याख्यो योगो जन्माष्टमी तदा।

अन्तर्भूता जयन्त्यां स्याद् ऋक्षयोगप्रशस्तितः।।

                                                निर्णयसिन्धु


जयंती बुधवारे च रोहिण्या सहिता यदा।

भवेच्च मुनिशार्दूल किं कृतैर्व्रतकोटिभिः।।


उस पर भी सुंदर संयोग ये है कि यह बुधवार युक्त है जिसका फल करोड़ों व्रत के समान है 


गंधपुष्पैश्च धूपैश्च घृतपूर्णप्रदीपकैः ।

पूजयेद्भक्तिभावैश्च दद्याद्विप्राय दक्षिणाम् ३९।

विधिनानेन यो विप्र जयंतीं प्रकरोति च ।

नरो वै तारयेद्भक्त्या पुरुषानेकविंशतिम् ४०।

न दौर्भाग्यं न वैधव्यं न भवेत्कलहो गृहे ।

संततेर्न विरोधं च न पश्यति धनक्षयम् ४१।

यान्यांश्चिकीर्षते कामान्जयंती समुपोषकः ।

तांस्तान्प्राप्नोति सकलान्विष्णुलोकं स गच्छति।।


गंधपुष्प, धूप घी के दीपक आदि से जो भी व्यक्ति इस व्रत को नियम पूर्वक करता है उसको सभी सुख प्राप्त होते हैं दुर्भाग्य, वैधव्य, ग्रह कलह, संतान  और धन संबंधी समस्याओं को वह व्यक्ति कभी नही देखता और अंततः विष्णुलोक में स्थान पाता है।


व्रत फल-


महाजयार्थं कुरु तां जयन्तीं मुक्तयेनघ। 

धर्ममर्थं च कामं च मोक्षं च मुनिपुङ्गव।। 

ददाति वाञ्छितानर्थान् ये चान्येप्यतिदुर्लभाः।


 इस व्रत के करने से विजय की प्राप्ति होती है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। दुर्लभ से दुर्लभतम मनोकामना की पूर्ति होती है।


समायोगे तु रोहिण्यां निशीथे राजसत्तम। 

समजायत गोविन्दो बालरूपी चतुर्भुजः।। 

तस्मात्तं पूजयेत्तत्र यथा वित्तानुरूपतः।। 


मध्य रात्रि में रोहिणी नक्षत्र लगने पर ही बाल रूप में भगवान गोविन्द ने चतुर्भुजी स्वरूप में अवतार लिया था। इसलिए ही अपने वैभव-व्यवस्था के अनुसार उनकी पूजा की जानी चाहिए। 


रोहिण्यामर्द्धरात्रे तु सदा कृष्णाष्टमी भवेत्। 

तस्यामभ्यर्चनं शौरेर्हन्ति पापं त्रिजन्मजम्।।


कृष्णाष्टमी को रोहिणी नक्षत्र के अर्धरात्रि में होने पर ही मनानी चाहिए। इससे तीन जन्मों के पाप का नाश होता है।

सोमवार, 28 अगस्त 2023

महत्वपूर्ण सरल ज्योतिष उपाय

 कुछ पर महत्वपूर्ण सरल ज्योतिष उपाय


ऐसा नहीं है कि ज्योतिष उपायों में कठिन और गहन उपाय ही काम करते हैं छोटे छोटे पर लगातार करने पर ये उपाय भी बहुत प्रभावशाली बन जाते हैं।


मैंने पहले भी कहा है जो व्यक्ति परिवार और समाज के लिए अपने कर्तव्यों को सही से निभाता है अनायास ही उसे ग्रहों के शुभ परिणाम मिलने शुरू हो जाते हैं।

पहले घरों में सबके नाम की रोटी निकालने की रीत थी जो आस पास के पशु पक्षियों को दी जाती थी।  ये जीव भी अलग अलग ग्रहों के कारक हैं।


अब न घर के आसपास इन पशुओं/पक्षियों की उपलब्धता है नहीं पहले जैसे नियमों को लोग निभा पाते हैं। 

 पर कभी कभी समय मिलने पर ये उपाय करने का प्रयास करें...... और इनके लाभ स्वयं महसूस करें।


1- गाय जो हरा चारा दें - मंदिरों गौशालाओं या सड़क पर घूमने वाले इन जीवों को हरा चारा, भीगी मूँग, घी रोटी और गुड़, अंकुरित जवारे(गेहूं) और चना खिलाएँ गाय सनातन धर्म मे पूज्यनीय है इन उपायों से आप अपने बुध, शुक्र, सूर्य और गुरु के अनुकूल परिणाम पा सकेंगे।


पक्षियों को दाना- पक्षियों को सात तरह के अनाज मिक्स (सतनाजा)करके खिलाएँ।

गेहूं

चावल

बाजरा

ज्वार

चने

मक्का

काली उड़द

ध्यान दें अनाज कभी भी छत के ऊपर न खिलाएँ बल्कि कच्ची मिट्टी वाली जगह पर खिलाएँ। सूर्य चंद्र मंगल बुध गुरु शुक्र शनि और राहु केतु लगभग सब की अनुकूलता के लिये है।


मछली को दाना-

मछली को आटे की गोलियां जब कभी मौका मिले खिलाइये मन मस्तिष्क का कारक चंद्र और राहु/केतु की अनुकूलता के लिए अचूक उपाय है।


कुत्ते को रोटी- 

ये जीव जंतु हम पर आश्रित हैं अगर घर के बाहर दिखाईं दें तो रोटी में तेल लगाकर खिलाएँ कर्म कारक शनि और राहु/केतु की अनुकूलता पाएं।


चींटी को पंजीरी/शक़्कर-

चींटियों को घर से बाहर ही पंजीरी, शक़्कर, भुना बेसन डालें। अनायास ही मंगल राहु सूर्य शनि और शुक्र के लाभ मिलेंगे। सूखे नारियल में बूरा तिल और घी भरके बढ़/पीपल की जड़ पर दबाकर रखवाते हैं इसका कारण है कि इन पुराने वृक्षों की जड़ों में चीटियां रहती है। जैसे जैसे नारियल और अन्य सामग्रियों को वो खाती जाती वैसे वैसे आपको लाभ मिलता जाता है।


अगले थ्रेड पर कुछ आसानी से उपलब्ध पर ग्रहों के कारक होने से चमत्कारिक प्रभाव वाले पौधों पर लिखूँगी जिनके स्वास्थ्य लाभ किसी भी अंग्रेज़ी दवाई से पहले बल्कि तुरंत लाभ दिखने लगते हैं।

ज्योतिष उपायों में "अर्चन" का महत्व

 ज्योतिष उपायों में "अर्चन" का महत्व


मैं ज्योतिष उपायों में अक्सर पूजा और अर्चना के विषय मे लिखती हूँ। जिसको समझने में लोग कंफ्यूज हो जाते हैं, विशेषकर "अर्चन" को लेकर।

"पूजा" का अर्थ है जब आप किसी स्तोत्र, मंत्र और पाठ आदि से भगवान का ध्यान और आराधना करें।

"अर्चना" मतलब किसी भेंट या सामाग्री से देवता का क्रमबद्ध पूजन जो कि अधिकतर सकाम मतलब "कामना की पूर्ति" के लिए किया जाता है।

अर्चना में आवश्यकता और मनोकामना के अनुसार ही अर्चन सामग्री का चयन किया जाता है।

गुम हुई वस्तु, प्रतिष्ठा को पाने का मंत्र

 गुम हुई वस्तु, प्रतिष्ठा को पाने का अचूक उपाय



गुम हुई वस्तु, धन, प्रतिष्ठा को वापस पाने के लिए  मंत्र।


रामचरितमानस के कुछ मंत्र स्वसिद्ध सौम्य शाबर मंत्र की श्रेणी में आते हैं जिनके प्रयोग में दो धारी तलवार के समान नुकसान देने वाली तीव्रता नही होती।

महादेव और अम्बिका के आशीर्वाद से ऐसे मंत्र/चौपाई/सोरठे, मैं आगे इस श्रृंखला में लिखती रहूँगी।


कलि बिलोकि जग हित हर गिरिजा। 

साबर मंत्र जाल जिन्ह सिरिजा॥

अनमिल आखर अरथ न जापू। 

प्रगट प्रभाउ महेस प्रतापू ।।

                    रामचरितमानस, बालकाण्ड


शिव-पार्वती ने कलियुग को देखकर, जगत् के हित के लिए, शाबर मन्त्र समूह की रचना की, जिन मंत्रों के अक्षर बेमेल हैं, जिनका न कोई ठीक अर्थ होता है और न जप ही होता है, तथापि श्री शिवजी के प्रताप से जिनका प्रभाव प्रत्यक्ष है।


अगर आपने मंत्र विज्ञान के बारे में जाना है तो आपको पता होगा कि शाबर मंत्रों को तुरंत फल देने वाला माना जाता है, पर इनकी शक्ति इतनी तीव्र होती है कि गलत प्रयोग से व्यक्ति स्वयम का भी नुकसान कर सकता है इसलिए इन्हें गुरु सानिध्य में ही करना चाहिए।  मानस के ये मंत्र महादेव के आशीर्वाद से बिना गुरु से प्राप्त किये भी प्रयोग किये जा सकते हैं।


तो खोई हुई वस्तु पाने का छोटा और सरल दिखने वाला पर अचूक मंत्र/चौपाई लिखते हैं इसका प्रयोग विभिन्न विधियों से आवश्यकता अनुसार व समस्या की स्थिति देख कर किया जाता है। 

आप सामान्यतः इसकी 11/21/27....... माला जप कर सकते हैं।

कुछ भी चोरी होने, गुम होने पर, कही पैसे फस जाने, किसी के घर छोड़कर जाने पर, प्रतिष्ठा हानि होने पर उन्हें वापस पाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।


गई बहोर ग़रीब नेवाजू। 

सरल सबल साहिब रघुराजू॥


प्रभु श्री रघुनाथजी गई हुई वस्तु को फिर प्राप्त कराने वाले, ग़रीब नवाज (दीनबन्धु), सरल स्वभाव, सर्वशक्तिमान और सबके स्वामी हैं।